सडकों पर अस्थायी अतिक्रमण हटाने वाली गैंग सफेद वाहन से इस दौरान पूरी तरह से घंटाघर क्षेत्र में सक्रिय

खुसूर-फुसूर

गैंग की अजब गजब कार्रवाई…

बात शुक्रवार रात की शहर के घंटाघर टावर की है। पूरे मामले को देखने वाले गैंग की कार्रवाई को गैंग की अजब गजब कार्रवाई बोलने से नहीं चुके हैं। हुआ यूं की रात 8 बजे के लगभग एक छोटे भारवाहक वाहन से दो व्यक्ति घंटाघर के उस क्षेत्र में पहुंचे जहां कारों की पार्किंग की जाती है। यहीं पर किलो से कपडे बेचने के कारोबार की दुकान है। शहर की संस्था की सडकों पर अस्थायी अतिक्रमण हटाने वाली गैंग सफेद वाहन से इस दौरान पूरी तरह से घंटाघर क्षेत्र में सक्रिय थी। वाहन वाले ने वाहन को कारों की पार्किंग के बीच ही वाहन लगाकर शटर खोला और 50 रूपए में चार दूध पीने के कप बेचने लगा। देखते ही देखते उनके वाहन पर लोगों की भीड उमडने लगी। करीब डेढ घंटे के समय में वाहन आधा खाली हो गया। करीब 9.15-9.30 के दरमियान एक दम से गैंग के ईमानदार और दबंग कर्मचारी पूरी कर्मनिष्ठा के साथ धडाधड आए और वाहन वाले को जमकर अपने सुसंस्कृत शब्दों से चमकाया। वाहन का शटर बंद करवाया और मग लेने के लिए खडे लोगों को भी हडकाया। इसके बाद वाहन वाले को मय वाहन के अपने साथ ले गए। मग लेने से वंचित रहे लोगों में इस पर खुसूर-फुसूर शुरू हो गई। इसमें कुछ ने कहा कि जब एक डेढ घंटे पहले वाहन वाला आकर इनके सामने ही खडा हुआ था तो फिर उसे तत्काल क्यों नहीं रोका गया। उसका धंधा सुचारू होने के बाद ही उसे रोका जाना जायज स्थिति में नहीं कहा जा सकता। इस समय के दौरान जब चौराहों के सिग्नल बंद हो जाते हैं ऐसे में एक तरफ खडे कारोबारी को ही यातायात में बाधक बताकर क्यों रोका गया ,जबकि घंटाघर के चारों और इस दौरान जाम के हाल बने हुए थे। फ्रीगंज शहीद पार्क जाने वाले मार्ग की रोटरी के पास सडक पर ही वाहन की पार्किंग की गई थी। सफेद वाहन वाली गैंग मग बेचने वाले एवं उसके वाहन को साथ लेकर गए उसके बाद कार्रवाई क्या  की गई इसका कोई हिसाब किताब सामने नहीं है। गैंग के इस अजब गजब काम को लेकर लोगों ने उन शब्दों का भी उपयोग किया जो कि बगैर पुष्टि के उचित नहीं कहे जा सकते हैं, पर ये जरूर है कि पूरे मामले में इतनी रात को एक ही क्षेत्र में कुछ लोगों को छूट एवं एक को सुसंस्कृत शब्दों से हडकाना भेदभाव तो स्पष्ट करता ही है। गैंग की कार्रवाई सवालों के घेरे में तो कही ही जाएगी। यही नहीं उसके उद्देश्यों को भी सही नहीं कहा जा सकता है। स्मार्ट शहर के सीसीटीवी कैमरा पूरी हकीकत को समेटे बैठे हैं। आमजन के सवालों के घेरे में आए इस मुद्दे को लेकर स्मार्ट अफसरों को उन्हें देखने की कवायद करना चाहिए और अपने प्रशासन के निचले नुमाइंदों की हरकतों पर संज्ञान लेना चाहिए।

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