हिरासत में आने पर बेग से मिले 1.17 लाख के उपकरण रिमांड पर नर्मदा-क्षिप्रा परियोजना के वॉल्व चुराने वाला

उज्जैन। नर्मदा-क्षिप्रा बहुउद्देशीय परियोजना में लगाये गये उपकरण (वॉल्व) चोरी करने वाला बदमाश हिरासत में आ गया। उसके पास से 1.17 लाख से अधिक कीमत के वॉल्व बरामद किये गये है। शनिवार को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया और रिमांड पर लिया।
तराना थाना प्रभारी रामनारायणसिंह भदौरिया ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में नर्मदा-क्षिप्रा परियोजना में किसानों के खेतों में डाली गई पाइप लाइन के ओएमएस बॉक्स से पीएफसी वॉल्व चोरी होने की शिकायत परियोजना अधिकारियों द्वारा की गई थी। पुलिस के साथ परियोजना के अधिकारी-कर्मचारी नजर रख रहे थे। इसी दौरान खबर मिली कि परियोजना कर्मचारी ने ग्राम नाटाखेड़ी-बगोदा स्थित परियोजना क्षेत्र में एक संदिग्ध व्यक्ति के घूमने हुये देखा है। पुलिस पहुंचती उससे पहले कर्मचारी ने ग्रामीणों की मदद से उसे पकड़ लिया था। उसके बेग में चोरी किये गये परियोजना के वॉल्व भरे थे। पुलिस मौके पर पहुंच उसे हिरासत में लिया। पूछताछ करने पर चोरी करने वाला का नाम दरबारसिंह पिता चरणसिंह  निवासी ग्राम भैसाखेड़ी थाना टोंकखुर्द जिला देवास होना सामने आया। उसके पास से 28 वॉल्व बरामद किये गये। जिसकी कीमत 1.17 लाख से अधिक पाई गई है। आरोपी के खिलाफ धारा 303(5) भारतीय न्याय संहिता का प्रकरण दर्ज किया गया। शनिवार को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया है। इस बात की जानकारी जुटाई जा रही है कि उपकरण चोरी में वह अकेला शामिल है या फिर उसके अन्य साथी भी है। वह कब से उपकरण चोरी कर रहा था और कहां ठिकाने लगाने वाला था।
एक वॉल्व की कीमत 4 हजार 200
एसआई हरिराम अंगोरिया ने बताया कि परियोजना में लगाये गये वॉल्व पीतल से बने है। एक वॉल्व की कीमत 4 हजार 200 रूपये है। वॉल्व को इजराइल की कंपनी द्वारा बनाया गया है। जो मोबाइल से आॅपरेट होते है। वॉल्व को चालू करने पर खेतों से लेकर औद्योगिक क्षेत्र में पानी की सप्लाय को शुरू हो जाती है। मोबाइल से ही सप्लाय को बंद किया जाता सकता है।
कई गांवों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित
नर्मदा परियोजना अधिकारी रितेश दीक्षित ने बताया कि तराना, शाजापुर, मक्सी और महिदपुर के ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए 15 सौ से अधिक बॉक्स लगाए गए हैं। चोरी की वारदात के बाद कई गांवों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो गई थी। पूर्व में भी वॉल्व चोरी के मामले सामने आ चुके है। भारत में वॉल्व की उपलब्धता मुश्किल है।

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