यूडीए परिसर में धरती के दामन को पानी से भरने की तैयारी जल जमाव की जगह बनाया सरफेस वाटर रिचार्ज पिट -आधा बीघा क्षेत्र में होता है बडा जलजमाव,कार्यालयों में प्रवेश में आती है समस्या

उज्जैन। उज्जैन विकास प्राधिकरण ने अपने पुराने परिसर में धरती के दामन को पानी से भरने की तैयारी कर ली है। परिसर के एक क्षेत्र में जल जमाव वाले स्थान पर एक बडा 10 बाय 10 फीट आकार का सरफेस वाटर रिचार्ज पिट बनाया जा रहा है। इससे करीब 2 बीघा से अधिक जमीन के जलजमाव को धरती में सहेजा जा सकेगा इसके साथ ही तीन बडे भवनों की छत के पानी को भी यहां जमीन में उतारा जा सकेगा।

उज्जैन विभाग प्राधिकरण की स्थापना उज्जैन संभाग की स्थापना के बाद हुई। शुरूआत में इसका प्रारंभिक कार्यालय कंट्रोल रूम के पास एलआईसी के भवन के स्थान पर नगर सुधार न्यास के कार्यालय में संचालित होता था। उसके उपरांत भरतपुरी क्षेत्र में इसका पहला कार्यालय तीन बिल्डिंगों के निर्माण के साथ हुआ । यहां निचले तल में बाद में बैंक का संचालन होता रहा जो वर्तमान में 6 मंजिला स्वयं के भवन में चल रहा है।

ये किया जा रहा-

विकास प्राधिकरण ने अपने पुराने परिसर में सुलभ शौचालय के पास की खाली पडी जमीन में सरफेस रिचार्जिंग पीट बनाया है। यहां पास की छोटी बिल्डिंग में भोज का क्षेत्रीय कार्यालय एवं पिछडा वर्ग का कार्यालय संचालित होता है। इस परिसर के तीन भवनों की छत का और परिसर का पानी ढलान इस और होने से यहीं पर एकत्रित होता है जिससे बरसात के समय में भोज के क्षेत्रीय कार्यालय एवं पिछडा वर्ग कार्यालय में जाना बहुत मुश्किल हो जाता है। पुरा क्षेत्र तालाब का रूप ले लेता है। यहां इकट्ठा होने वाले सतह के पानी को जमीन में डालने के लिए पीट बनाया गया है। बकौल सहायक यंत्री सतीश मुंगी जल जमाव का क्षेत्र होने से यहां पीट बनाया गया है। इसका केल्कुलेशन नहीं किया गया है कि कितनी जमीन एवं छतों का पानी इसमें समाहित होगा।

करीब 4 बीघा का पानी सहेजा जाएगा –

विकास प्राधिकरण के पुराने परिसर में कुछ समय पूर्व तक आरटीओ कार्यालय संचालित होता था। यहां एक से लगायत एक तीन भवन बने हैं। ये पूरा परिसर लगभग एक हेक्टेयर का है। इसमें करीब 3 बीद्या खुली जमीन है और 2 बीद्या क्षेत्र में तीन भवन बने हुए हैं। परिसर का पानी एक तरफ ढलान होने से उसी और आता है। ढलान के मुहाने पर बडी नाली है जिसमें यह पानी जाकर सीधे ऋषिनगर के नाले में होता हुआ नदी तक चले जाता है। भवन की छतों का पानी भी परिसर में इसी स्थान की और आता है। ऐसे में करीब 4 बीघा क्षेत्र का पानी सरफेस रिचार्जिंग पीट में एकत्रित होकर जमीन के दामन को भरेगा। बकौल श्री मुंगी भवनों के लिए भी विचार किया जा रहा है कि इनकी छतों के पानी को सहेजने के लिए भी सिस्टम बनाया जाए।

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