दीप पर्व पर उम्मीद की लौ: 5 पीढ़ियों से पुश्तैनी हुनर को सहेज रहे अकोदिया के कुम्हार परिवार

अकोदिया।दीपावली का पावन पर्व नजदीक आते ही बाजारों में हलचल बढ़ गई है और घर-आंगन को रोशन करने वाले मिट्टी के दीयों की मांग भी तेज होने लगी है। जब इन पारंपरिक दीयों की लौ हमारे घरों में जगमगाती है, तो उसके साथ सदियों पुरानी भारतीय संस्कृति और परंपराएं भी जीवंत हो उठती हैं। लेकिन इन छोटे-छोटे दीयों के पीछे छिपा होता है कुम्हार समाज के परिवारों का पीढ़ियों का संघर्ष, कड़ी मेहनत और अद्भुत हुनर। अकोदिया नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रजापति (कुम्हार) समाज के ऐसे कई परिवार हैं, जो पिछले पांच पीढ़ियों से मिट्टी को सुंदर आकार देकर लोगों के त्योहारों में उज्‍ज्‍वाला बिखेर रहे हैं।समय के बदलाव के साथ बाजार बदला और दीये बनाने के तौर-तरीके भी आधुनिक हुए, लेकिन इन परिवारों ने अपनी पुश्तैनी कला का साथ नहीं छोड़ा। आज भी राधाकिशन प्रजापति, रूपसिंह प्रजापति, नारायण, पृथ्वी सिंह, जगदीश और रामप्रसाद जैसे कई समर्पित कारीगर इस परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। इनके हाथों से तैयार मिट्टी के कलात्मक दीये, मटके, मूर्तियां, हवन कुंड, गुल्लक और धूपदानी बाजारों तक पहुंच रहे हैं। चाक पर मिट्टी का ढेला रखते ही कारीगरों की उंगलियों का जादू साफ दिखाई देने लगता है।
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