बिजली कटौती से त्रस्त किसानों ने रात्रि में किया हंगामा भोपाल से संचालित लोड मैनेजमेंट शेड्यूल ने बढाई मुसीबत

 सारंगपुर।सारंगपुर के अंतर्गत आने वाले बालोंडी गांव और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित और लगातार हो रही बिजली कटौती से परेशान किसानों और ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार फूट पडा। शुक्रवार रात को किसानों ने बिजली कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और नियमित बिजली सप्लाई की मांग को लेकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक साल से ग्रामीण इलाकों में बिजली की भारी समस्या बनी हुई है, जबकि शहरों को निर्बाध बिजली मिल रही है। उन्होंने बिजली विभाग पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच भेदभाव करने का गंभीर आरोप लगाया है।
गेहूं की फसल और सिंचाई पर संकट-प्रदर्शन में शामिल किसानों ने बताया कि वर्तमान में खेतों में गेहूं की फसल बोई जा चुकी है और इस समय फसलों को सींचने के लिए पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है। लेकिन घंटों बिजली गायब रहने के कारण ट्यूबवेल और पंप नहीं चल पा रहे हैं, जिससे उनकी पूरी खेती प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, रात के समय होने वाली कटौती से घरों में बच्चे और बुजुर्ग मच्छरों व उमस के कारण खासे परेशान हैं। कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान अटल ज्योति सिर्फ नाम की है और विद्युत कंपनी हाय-हाय के नारे गूंजे। मौके पर मौजूद ऑपरेटर मनोज बादल ने ग्रामीणों को सफाई देते हुए बताया कि यह बिजली कटौती स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि भोपाल से आ रहे निर्देशों के तहत की जा रही है, इसलिए स्थानीय कर्मचारी इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इस प्रदर्शन में वीरेंद्र सिंह राजपूत, बालू सिंह राजपूत, चंद्रपाल सिंह, रोहित झाला, जसमत सिंह और निखिल माहेश्वरी सहित बडी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।
सुधरने के बजाय बिगड़े हालात, रात्रि में हर 2 घंटे में आ-जा रही बिजली
ग्रामीणों के आरोपों की पुष्टि विभागीय आदेशों से भी होती है। किसानों का कहना है कि बीती रात दो-दो घंटे में बिजली का आना-जाना लगा रहा। पीएलएम भोपाल द्वारा जारी किए गए डिवीजन एनडीसीसी के आधिकारिक लोड मैनेजमेंट निर्देशों के अनुसार घरेलू फीडरों पर भारी कटौती की जा रही है। हालात यह रहा है कि शाम 6 बजे लोड मैनेजमेंट के तहत फीडर बंद किए गए, जो रात्रि 8 बजे बिजली लोटी। इसके बाद पुन: रात 10 बजे बिजली बंद हुई, जिसें रात्रि 12 बजे चालू किया गया। देर रात्रि 2:46 बजे और सुबह 05:45 बजे बिजली भोपाल से बंद कराई गई। इन निर्देशों में साफ कहा गया है कि भोपाल स्तर से तय इस बार-बार की कटौती और लोड शेडिंग के चलते ग्रामीणों और किसानों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, जिससे प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों का असंतोष लगातार बढता जा रहा है।

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