उज्जैन। उधार नहीं चुकाना पड़े इसलिये उधार देने वाले की हत्या कर 7 दिनों तक लाश छुपाने वाले 2 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। हत्या में नाबालिग शामिल था, जिसका फैसला आना शेष है। मृतक की परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
राघवी थाना क्षेत्र के ग्राम खेड़ाखजूरिया में रहने वाले नरेन्द्र पिता मुरलीसिंह सौंधिया 22 साल की 15 अगस्त 2023 को ग्राम महुडी में सरपंच अंतरसिंह आंजना के खेत से बोरे में बंद लाश मिली थी। जो 7 से 8 दिन पुरानी होना सामने आई थी। राघवी थाना एसआई शैलेन्द्रसिंह अलावा ने मामले में मृतक की पहचान के प्रयास शुरू किये थे। इस दौरान सामने आया कि नरेन्द्र सौंधिया की गुमशुगदी परिजनों ने चिमनगंज थाने में 8 अगस्त को दर्ज कराई गई है। नरेन्द्र के पिता आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। नरेन्द्र ने सुनील पिता कचरूलाल को डेढ़ लाख उधार दिये थे। मेडिकल कॉलेज से रूपये लेने सुनील के पास गया था उसके बाद से नहीं लौटा है। गुमशुदा की हत्या होने पर धारा 302 का अपराध दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई। सुनील पिता कचरूलाल परमार 25 साल निवासी ढाबली कम्मा राघवी को हिरासत में लिया गया और पूछताछ की गई तो उसने अपने साथी बलराम उर्फ बल्लू पिता सिद्धूलाल परिहार 24 साल निवासी खेड़ाखजूरिया और नाबालिग के साथ हत्या करना कबूल कर लिया। पुलिस ने साथी और नाबालिग को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। मीडिया सेल प्रभारी कुलदीपसिंह भदौरिया ने बताया कि 33 माह चली सुनवाई के बाद महिदपुर न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश कमलेश सनोड़िया ने फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। नाबालिग का मामला बाल न्यायालय में विचाराधीन है। जिसका फैसला आना शेष है। प्रकरण में प्रभारी उप निदेशक अभियोजन राजेन्द्र कुमार खाण्डेगर के मागदर्शन में पैरवी कमलसिंह गोयल विशेष लोक अभियोजक द्वारा की गई।
तलवार से मारा, डबरी में था डूबोया
राघवी थाना तत्कालीन एसआई शैलेन्द्रसिंह अलावा ने बताया कि आरोपियों के हिरासत में आने पर सामने आया था कि सुनील परमार उधार रूपये नहीं लौटाना चाहता था उसने साजिश रची और साथियों के साथ मिलकर 7 अगस्त 2023 को रूपये देने के बहाने नरेन्द्र को बुलाया। मेडिकल कॉलेज से नरेन्द्र खेड़ा खजूरिया पहुंचा, जहां से तीनों अनाज मंडी के पीछे लेकर गये। वहां तलवार से हमला किया और मुंह दबाकर समीप डबरी में डूबा दिया। तलवार और मृतक का मोबाइल भी पानी में फेंक लौट गये। 8 अगस्त को बलराम घटना स्थल डबरी के पास पहुंचा। मृतक ऊपर आ गया था। उसकी लाश के साथ पत्थर बांध फिर से डूबो दिया। 9 अगस्त को महिदपुर से दो टाट के बोरे खरीदे और लाश को पानी से निकालकर उसमें भरने के बाद बाइक से ग्राम महुडी में कुऐ के पास खेत में लाश फेंक कर भाग निकले। जिसके बाद 15 अगस्त को लाश मिलना सामने आया था।
उधार नहीं चुकाना पड़े इसलिये दिया था हत्या को अंजाम 7 दिनों तक छुपाई थी लाश, मिला आजीवन कारावास