शाजापुर। मध्य प्रदेश में सरकार भले ही ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ और ‘बलराम कृषि महोत्सव’ के जरिए किसानों के कल्याण के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन शाजापुर कृषि उपज मंडी में हुआ नजारा कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। यहां महोत्सव के नाम पर मंच पर तो बड़े-बड़े नेता और दिग्गजों का जमावड़ा दिखा, लेकिन पंडाल में किसानों की जगह खाली कुर्सियां ही तालियां बजाती नजर आईं।
मंच पर दिग्गज, पंडाल में सन्नाटा-कार्यक्रम में अपेक्स बैंक के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे। उनके साथ स्थानीय विधायक अरुण भीमावत, जिला अध्यक्ष रवि पांडे और पूर्व विधायक जसवंत सिंह हाड़ा जैसे कई दिग्गज नेता भी मौजूद रहे। तामझाम और वीआईपी मौजूदगी पूरी थी, लेकिन जब बात किसानों की भीड़ जुटाने की आई, तो सारे प्रशासनिक दावे फुस्स साबित हुए। हाल यह था कि पंडाल की आधे से ज्यादा कुर्सियां खाली पड़ी थीं और सन्नाटा पसरा हुआ था।
अधिकारियों को करनी पड़ी खासी मशक्कत-खाली कुर्सियों को देख कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और कृषि विभाग के कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए। फिर क्या था, अपनी नौकरी और रिपोर्ट बचाने के लिए साहब लोग खुद मैदान में उतर गए। अधिकारी इधर-उधर मंडराते दिखे और आने-जाने वाले किसानों को हाथ जोड़कर, समझा-बुझाकर और लगभग ‘पकड़-पकड़’ कर कुर्सियों पर बैठाते नजर आए।
सरकारी आयोजनों की खुल गई पोल –इस चटपटे और दिलचस्प नजारे ने एक बार फिर सरकारी आयोजनों की असलियत सामने ला दी है। करोड़ों खर्च करने और व्यापक प्रचार-प्रसार के दावे करने के बावजूद जब अन्नदाता ही स्वंम अपने आप तरीके से नहीं पहुंचे, तो महकमे की किरकिरी होना लाजिमी था। कुल मिलाकर कहें तो, मंच से किसानों के हक में भाषण तो खूब हुए, लेकिन कुर्सियों को भरने के लिए अधिकारियों को जमकर पसीना बहाना पड़ा।