पैसे डबल करने का झांसा देकर 2 करोड़ रु.की धोखाधड़ी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

ब्यावरा।राजगढ़ जिले के ब्यावरा सिटी पुलिस थाना अंतर्गत फरियादी देवेन्द्र पिता कृपाशंकर पालीवाल 46 वर्ष निवासी ब्यावरा ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि प्रफुल्ल गजभिये ने स्वयं को बड़ी कम्पनी से जुड़े लोगों का परिचित बताते हुए निवेश की रकम दोगुनी करने का लालच दिया। उसके द्वारा अन्य आरोपियों से फरियादी की मुलाकात कराई तथा फर्जी ई-मेल एवं दस्तावेज दिखाकर विश्वास में लिया। आरोपियों ने फरियादी को 2 करोड़ रु निवेश करने पर अधिक राशि वापस मिलने का झांसा दिया। भोपाल में आरोपियों ने फरियादी से 2 करोड़ रु नगद प्राप्त कर उसे हवाला, आंगड़िया के माध्यम से भेजने की बात कही तथा फर्जी भुगतान संदेश दिखाकर उसे भ्रमित किया। राशि वापस प्राप्त नहीं होने पर फरियादी को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला। फरियादी दो दिनों तक आरोपियो की तलाश भोपाल में करता रहा कोई जानकारी नहीं मिलने पर थाना ब्यावरा पुलिस को सूचित किया। ब्यावरा पुलिस ने अपराध पंजीकृत किया। प्रथम दृष्टया आरोपियों द्वारा आपराधिक षड्यंत्रपूर्वक धोखाधड़ी कर राशि हड़पने पर थाना ब्यावरा शहर में अपराध क्रमांक 590/2026, धारा 318(4), 61(2), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक राजगढ़ ने आरोपियों की गिरफ्तारी एवं ठगी गई राशि की बरामदगी हेतु 10 विशेष पुलिस टीमों का गठन किया जिसमें लगभग 50 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। आरोपियों के मूवमेंट व आपसी कनेक्शन की कड़ियां जोड़ने के लिए अलग-अलग राज्यों में करीब 3 हजार से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले। पुलिस टीमों ने लगभग 30 हजार किलोमीटर की दूरी तय करते हुए करीब 35 दिनों तक लगातार कार्रवाई की, आरोपियों की तलाश में महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा सहित 10 राज्यों में लगातार दबिश दी और विभिन्न राज्यों से 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इस गिरोह की कार्य प्रणाली कई स्तरों में बँटी  थी- जिसमे पहला स्तर था मालदार पर जरूरतमंद पीड़ित को चिन्हित करना।
दूसरा परिचय कराना और पीड़ित का विश्वास जीतना। इसके लिए बड़ी कंपनी का नाम, महँगी गाड़ियाँ, होटल में बैठक और व्यवस्थित दस्तावेजों का सहारा लिया।
तीसरा फर्जी ई-मेल, स्वीकृति-पत्र और भुगतान संदेश दिखाकर निवेश को वास्तविक सिद्ध करना। चौथा स्तर था पीड़ित से अधिकतम नकद राशि प्राप्त करना, ताकि बैंकिंग माध्यम में तत्काल कोई रिकॉर्ड न बने। पाँचवाँ नकद राशि को हवाला अथवा आंगड़िया नेटवर्क के माध्यम से अलग-अलग व्यक्तियों और शहरों तक पहुँचाना और अंतिम स्तर पर गिरोह के सदस्य राशि को आपस में बाँटकर अपने ठिकाने, मोबाइल नंबर और शहर बदल देते थे। इसमें विशेष बात यह है कि हर लिंक पर आरोपी अपना नाम छुपा कर ट्रेड नाम रखते हैं एवं एक व्यक्ति अपने से ऊपर की लिंक और नीचे की लिंक से ही जुड़ा है द्वितीय लिंक के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं होती। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फरियादी को कंपनी में निवेश के नाम पर विश्वास में लेकर 2 करोड़ रु की राशि देने के लिए तैयार किया। माधव असोरे जो कंपनी कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहा था तथा सुजीत टेम्बेकर एवं साहिल नीसवाडे ने फरियादी की तलाश एवं पहचान कर उसे गिरोह के संपर्क में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद प्रफुल्ल गजभिये एवं सचित कामले ने कंपनी के एजेंट के रूप में, दिनेश वीरानी ने कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में तथा वासुदेव गाडेकर ने कंपनी के डायरेक्टर के रूप में स्वयं को प्रस्तुत कर फरियादी से मुलाकात की। इन आरोपियों ने कंपनी एवं निवेश योजना को वास्तविक एवं विश्वसनीय बताते हुए फरियादी का विश्वास हासिल किया तथा उसे 2 करोड़ रु की राशि देने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फरियादी को विश्वास में लेने के लिए भोपाल एवं ब्यावरा स्थित होटल प्रेसिडेंट एवं होटल रेडिएंट में आरोपियों द्वारा मुलाकात एवं बातचीत की। इन बैठकों में कंपनी, निवेश योजना एवं राशि के संबंध में चर्चा कर फरियादी को निवेश के लिए आश्वस्त किया। इसके बाद गिरोह द्वारा फरियादी से 2 करोड़ रु की राशि प्राप्त करने की योजना को अंतिम रूप दिया गया। भोपाल के जहांगीराबाद स्थित बाबूलाल कांतीलाल कोरियर ऑफिस पर फरियादी से 2 करोड़ रु की नगद राशि प्राप्त की। जांच में सामने आया कि अंगड़िया हेड आरिफ हुसैन के कहने पर सन्नी उर्फ शमीम मंडल एवं मुस्कीम मंडल राशि लेने के लिए जहांगीराबाद भोपाल पहुंचे। दोनों ने फरियादी से 2 करोड़ रु की नगद राशि प्राप्त की और इसके बाद फरियादी को विश्वास में रखने के लिए 4 करोड़ रु के आरटीजीएस का फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर वहां से फरार हो गए। राशि प्राप्त होने के बाद गिरोह के सदस्यों द्वारा रकम को अलग-अलग स्थानों एवं व्यक्तियों के माध्यम से स्थानांतरित करने, बांटने एवं खपाने का कार्य किया। जांच में आरिफ हुसैन, नवीन जैन, कांतीलाल उर्फ कमल, अशोक चौधरी एवं बोनी यामीन की भूमिका राशि को महाराष्ट्र से अलग-अलग व्यक्तियों एवं स्थानों तक पहुंचाने, बांटने तथा खपाने में सामने आई। आरोपी आरिफ पिता साजोद्दीन हुसैन 36 वर्ष, निवासी ओवला, ठाणे वेस्ट, महाराष्ट्र। अशोक पिता मांगीलाल चौधरी 32 वर्ष, निवासी एनएचसी कॉलोनी, बोरीवली वेस्ट, मुंबई, महाराष्ट्र। नवीन पिता चेतन प्रकाश जैन 45 वर्ष, निवासी सी-497, सरस्वती नगर, जोधपुर, राजस्थान। सन्नी उर्फ शमीम मंडल पिता मो. अजीजुल मंडल 35 वर्ष निवासी ग्राम रघुनाथपुर मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल। मुस्कीम मंडल पिता नस्रुद्दीन मंडल 32 वर्ष, निवासी ग्राम रघुनाथपुर, मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल। कांतीलाल उर्फ कमल पिता नारायण लाल माली 40 वर्ष, निवासी गोलीगुड़ा, हैदराबाद। बोनी यामीन पिता मोनीरुज्जुमान मंडल 32 वर्ष निवासी ग्राम सकुआ, मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल। वासुदेव पिता गंगाधर गाडेकर 59 वर्ष, निवासी ग्राम किवले, पुणे, महाराष्ट्र। दिनेश पिता अशोक वीरानी 52 वर्ष निवासी जरीपटका एरिया, नागपुर, महाराष्ट्र। प्रफुल्ल पिता अम्बादास गजभिये 42 वर्ष, निवासी वाठोडा ले आउट, नागपुर, महाराष्ट्र। सचित पिता मारकंड कामले 46 वर्ष, निवासी शताब्दी चौक, नागपुर। सुजीत पिता रामाजी टेंबेकर 51 वर्ष निवासी ग्राम पिनकेपार डकरम सुकड़ी, जिला गोंदिया, महाराष्ट्र। माधव पिता पूरारजी असोरे 46 वर्ष निवासी 87 मालेगांव रोड, दयासागर नगर, तारोडा खुर्द, जिला नांदेड, महाराष्ट्र। साहिल पिता रमेश नीसवाडे 25 वर्ष निवासी प्लाट नं. 124, जय गुरुदेव नगर, मानेवाडा-बैसा रोड, नागपुर, महाराष्ट्र से कुल नगद राशि  1 करोड़ 73 लाख 16 हजार रु., 04 चार पहिया वाहन  1 करोड़ 12 लाख रु., 19 एंड्रॉयड मोबाइल फोन  7 लाख 75हजार रु., कुल 2 करोड़ 92 लाख 91 हजार रु का माल जप्त किया। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य व्यक्तियों, फर्जी कम्पनी, ई-मेल संचालन, हवाला, आंगड़िया नेटवर्क, बैंक खातों एवं ठगी की राशि के लेन-देन के संबंध में जानकारी एकत्रित की जा रही। जप्त मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच जारी है। उक्त प्रकरण में विवेचना के दौरान पाया गया कि आरोपियो के द्वारा इंदौर में भी इसी प्रकार धोखाधड़ी करने का प्लान बनाया था परंतु राजगढ़ पुलिस द्वारा आरोपियो की गिरफ्तारी की जाने से उक्त प्लान फेल हो गया। आरोपियो के द्वारा इसके पूर्व में पश्चिम बंगाल में 50 लाख एवं दिल्ली पुलिस के अधिकारी के साथ भी 50 लाख की धोखाधड़ी की साथ ही यह भी जानकारी प्राप्त हुई कि आरोपियो के ऑफिस उदयपुर,बंगाल, इंदौर, भोपाल, दिल्ली, मुंबई में भी है।
उक्त  कार्रवाई में जिला राजगढ़ पुलिस की विशेष टीम के साथ-साथ मुंबई, नांदेड़, लातुर,भदौही, पुणे, हैदराबाद, केरल, तेलंगाना, भोपाल की सिटी पुलिस ने सभी आरोपियो की गिरफ्तारी एवं ठगी गई राशि की बरामदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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