त्रिवेणी हिल्स में दर्दनाक हादसा, 2 मासूम आईसीयू में भर्ती जहरीली गैस से थमी 2 मासूम नन्ही बहनों की सांसे

उज्जैन। त्रिवेणी हिल्स में मंगलवार को दर्दनाक हादसा होना सामने आया। नाना के घर आये चार मासूम नाती जहरीली गैस के प्रभाव में आ गये। उपचार के दौरान डेढ़ माह की बालिका की मौत हो गई। 3 मासूमों का आईसीयू में उपचार जारी है।
भूखी माता मंदिर मार्ग पर र्इंट भट्टा संचालित करने वाले लालचंद प्रजापत का  इंदौररोड स्थित त्रिवेणी हिल्स में मकान बना हुआ है। उन्होने अपनी एक बेटी पूजा का विवाह शाजापुर के तालाब की पाल में रहने वाले राहुल प्रजापत के साथ किया था। दूसरी बेटी रीना का कायथा में रहने वाले बंटी उर्फ हेमंत प्रजापत के साथ विवाह हुआ था। दोनों बेटियां कुछ दिन पहले अपने पिता के घर त्रिवेणी हिल्स आई थी। पूजा के साथ उसकी 5 साल की बेटी जेनिशा और डेढ़ माह की बेटी त्रिशा भी आये थे। रीना भी अपने बच्चों बाबू साढ़े तीन माह और अन्नु उर्फ हनिका 4 साल को साथ लेकर आई हुई थी। सोमवार-मंगलवार रात कमरे में सोते समय चारों मासूम बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। त्रिशा की हालत काफी खराब होने पर उसे मंगलवार सुबह निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के दौरान पाया कि नन्ही बालिका की हालत गंभीर है। उसे आईसीयू में भर्ती किया गया, कुछ देर बाद जेनिशा, अन्नू उर्फ हनिका और बाबू को भी परिवार हालत बिगड़ने पर निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। इस दौरान सामने आया कि चारों जहरीली गैस के प्रभाव में आये है। उनकी सांस नली से जहरीली गैस शरीर में फैल गई है। चारों का 2 निजी अस्पतालों के आईसीयू में उपचार चल रहा था। इस दौरान दोपहर में त्रिशा की सांस थम गई। नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेन्द्र कुमार यादव ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस अस्पताल पहुंची। डेढ़ माह की बालिका का शव पोस्टमार्टम के लिये चरक अस्पताल लाया गया। शाम 6 बजे के लगभग  पोस्टमार्टम के बाद बालिका का शव परिजनों को सौंपा गया। तभी कुछ देर बाद खबर मिली कि आईसीयू में भर्ती 4 वर्षीय अन्नू उर्फ हनिका की सांस भी थम गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल टीम को त्रिवेणी हिल्स बुलाया गया। थाना प्रभारी के अनुसार फिलहाल 2 बालिका की मौत होने पर मर्ग कायम किया गया है। जांच जारी है, डॉक्टर आईसीयू में भर्ती 2 मासूमों पर नजर बनाये हुए है।
गेहूं के ड्रमों में रखी थी कीटनाशक
पुलिस की प्रारंभिक जांच और पूछताछ में पता चला है कि मासूमों के नाना ने चार क्विंटल गेहूं चार ड्रमों में भरकर रखा था। गेहूं में कीड़े ना लगे इसको लेकर कीटनाशक दवा भी रखी गई। रात में चारों मासूम अपनी मां के साथ उसी कमरे में सोये थे, जहां गेहूं के ड्रम रखे थे। कमरे में वेंटिलेशन नहीं था, जिसके चलते गेहूं में रखे कीटनाशक की गैस कमरे में फैली और चारों मासूम प्रभाव में आ गये। कम उम्र के होने पर उन पर जहरीली गैस का प्रभाव काफी अधिक हुआ और हालत बिगड़ गई। घटनाक्रम के बाद से प्रजापत परिवार की आंखों से आंसू नहीं थम रहे थे।

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