जनसुनवाई केंद्र के बाहर किसान द्वारा स्वयं पर डीजल डालकर कियाआत्महत्या का प्रयास

  नीमच। – मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान उस समय हड़कंप मच गया, जब अपनी जमीन के विवाद को लेकर लगातार जनसुनवाई में पहुंच रहे कंजाड़ा निवासी किसान हीरालाल पिता घिसालाल मालवीय ने खुद पर डीजल डाल कर आत्मदाह का प्रयास किया गया । किसान का आरोप था कि उसकी सर्वे नंबर 702 की 0.117 हेक्टेयर जमीन पर दूसरे व्यक्ति द्वारा फर्जी सर्वे नंबर के आधार पर करीब 12 आरी जमीन पर कब्जा कर जबरन निर्माण किया जा रहा है और उसे न्याय नहीं मिल रहा है। किसान के आत्मघाती कदम से पहले ही पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़कर बचा लिया। घटना के बाद कलेक्टर कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया। किसान हीरालाल मालवीय ने आरोप लगाया कि उसकी जमीन सर्वे नंबर 702 में 0.117 हेक्टेयर है, जबकि सामने वाले व्यक्ति की वहां जमीन ही नहीं है। उसका आरोप है कि फर्जी तौर पर जमीन का नंबर बताकर उसकी करीब 12 आरी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है और वहां जबरन निर्माण भी कराया जा रहा है। किसान ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में नीचे स्तर के अधिकारी उसकी गलत जानकारी तैयार कर उसे गुमराह कर रहे हैं तथा उसे ही गलत साबित करने का प्रयास किया जा रहा है।किसान ने कहा कि वह अपनी शिकायत लेकर कई बार जनसुनवाई में पहुंच चुका है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। उसका कहना था कि कलेक्टर स्तर से उसकी बात सुनी जाती है, लेकिन मनासा तहसील के निचले स्तर के अधिकारी मामले में सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। किसान ने कहा कि यदि आज भी निर्माण कार्य नहीं रुका और उसकी जमीन का विवाद नहीं सुलझाया गया तो वह कलेक्टर कार्यालय से नहीं जाएगा। इसी दौरान उसने डीजल निकालकर खुद पर उड़ेल लिया और आत्मदाह की धमकी दी। पुलिस की तत्परता से बड़ा हादसा  टल गया।मामले में एडीएम बीएस कलेश ने बताया कि हीरालाल पिता घिसालाल मालवीय, निवासी कंजाड़ा, तहसील मनासा, पूर्व में भी लगातार जनसुनवाई में आकर अपनी भूमि सर्वे नंबर 701 एवं 702 का सीमांकन कराने की मांग कर चुका है। कलेक्टर द्वारा मामले में एसडीएम को जमीन का सीमांकन कराने के निर्देश दिए गए थे. एडीएम के अनुसार एसडीएम द्वारा दल गठित कर किसान की जमीन का एक-दो नहीं बल्कि सात बार सीमांकन कराया जा चुका है। मामले को कलेक्टर द्वारा टीएल में भी लिया गया था और प्रत्येक सप्ताह इसकी समीक्षा की गई। सीमांकन के बाद यह सामने आया कि किसान अपने वास्तविक रकबे के अनुसार ही जमीन पर काबिज है। एडीएम ने कहा कि किसान की मांग अपने वास्तविक रकबे से अधिक जमीन पर कब्जा दिलाने की है, जबकि प्रशासन किसी व्यक्ति को उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अतिरिक्त रकबा नहीं दिला सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमांकन के बाद किसान को उसकी जमीन से अवगत कराया जा चुका है।किसान के आरोप को खारिज करते हुए एडीएम बीएस किलेश ने कहा की किसान को उसकी वास्तविक रकबा अनुसार सीमांकन कर  कब्जा दिलाया जा चुका है।
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