गौतमपुरा थाना क्षेत्र में दो माह के भीतर तीन हत्याएं, पुलिसिंग पर उठे गंभीर सवाल

गौतमपुरा। थाना गौतमपुरा क्षेत्र में लगभग ढाई माह के अंतराल में सामने आई तीन हत्या की घटनाओं ने क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, अपराध की रोकथाम और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 12 जुलाई को बाबू राठौर की हत्या, 12 अगस्त को जलोदियाज्ञान खेड़ा में सामूहिक रूप से हुई हत्या की घटना और 2 सितंबर को भील बड़ौली में विष्णु पिता रामसिंह तंवर की हत्या—इन घटनाओं की समय-रेखा ने थाना क्षेत्र में पुलिसिंग की प्रभावशीलता पर चर्चा तेज कर दी है। पहली घटना में बाबू राठौर का शव खेत के पास मिला था। पुलिस ने 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर दीपक गुर्जर को पकड़ा था। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने हत्या की बात स्वीकार की थी। इसके बाद 12 अगस्त को जलोदियाज्ञान खेड़ा में आठ आरोपियों से जुड़ी हत्या की घटना सामने आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मामले में शेखर, इमरान, अलनूर, अजाबनूर, इजरायल, अफशर, रईसा बी सहित अन्य नाम सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार शेखर, इमरान, अफशर और इजरायल की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों के संबंध में फरारी की स्थिति बताई जा रही है।  इसके बाद 2 सितंबर को भील बड़ौली में विष्णु पिता रामसिंह तंवर की हत्या ने एक बार फिर थाना क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। जानकारी के अनुसार विष्णु का शव खेत में मिला था और प्रारंभिक जांच में सिर पर पत्थर से वार तथा चाकू के निशान सामने आए थे।यही सवाल अब थाना गौतमपुरा की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है।थाना प्रभारी अलका मेनिया के कार्यकाल में यदि लगभग 52 दिनों के भीतर तीन हत्या की घटनाएं थाना क्षेत्र में सामने आती हैं, तो पुलिस की बीट व्यवस्था, संदिग्ध एवं आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की निगरानी, पुराने विवादों की पहचान, संवेदनशील गांवों की पेट्रोलिंग और सूचना तंत्र की समीक्षा होना स्वाभाविक है। यह कहना उचित नहीं होगा कि प्रत्येक हत्या के लिए सीधे थाना प्रभारी को जिम्मेदार ठहराया जाए। हत्या जैसी घटनाओं में व्यक्तिगत अपराधियों की आपराधिक मंशा और परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं। लेकिन लगातार गंभीर घटनाओं की स्थिति में थाना स्तर की अपराध-नियंत्रण रणनीति और व्यवस्थापन की समीक्षा का सवाल जरूर बनता है।
अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से अपेक्षा-लगातार सामने आई इन घटनाओं के बाद पुलिस अधीक्षक इंदौर ग्रामीण और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को थाना गौतमपुरा की अपराध समीक्षा कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि तीनों घटनाओं के संदर्भ में पुलिस की पूर्व सूचना, पेट्रोलिंग, बीट व्यवस्था और निरोधात्मक कार्रवाई की स्थिति क्या थी। सवाल किसी एक अधिकारी को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि यह जानने का है कि गौतमपुरा थाना क्षेत्र में लगातार हो रही गंभीर आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस की रणनीति कितनी प्रभावी है।
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