वन विभाग को रेस्क्यू आपरेशन के प्रथम दिन निराशा हाथ लगी चालाक नीलगाय बोमा में झुंड से आई और पलटकर बिखरकर भागी,मात्र 2 पकडी गई -मात्र एक मादा-नर हाथ लगा,हेलीकाप्टर से एरियल सर्वे कर नए स्थान पर लगाया बोमा

 

उज्जैन। कृष्णमृगों एवं नीलगाय को पकडने के लिए शाजापुर जिले में अभियान को खासी सफलता हाथ लगी थी। अभियान के दुसरे चरण में उज्जैन तहसील में चालाक नीलगाय ने वन विभाग एवं दक्षिण अफ्रीका के दल को छकाया है। ब्रजराजखेडी में लगाए गए बोमा के प्रथम एंट्री तक नीलगाय झुंड में आई लेकिन उसके बाद पलटकर बिखरते हुए ऐसी भागी की दुर –दूर तक हाथ नहीं लगी है। मशक्कत के बाद एक नर –मादा को पकडा जा सका है।फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले वन्यजीवों में कृष्णमृगों एवं नीलगाय को पकडने के लिए वन विभाग ने दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों की मदद से शाजापुर एवं उज्जैन में अभियान चलाया है। शाजापुर में 10 से 31 अक्टूबर तक हेलीकाप्टर की मदद से बोमा में 1596 कृष्णमृग एवं नीलगाय को पकडकर प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्यों में छोडा गया है। इनमें 94 नीलगाय शामिल है। इसी के तहत अभियान के दुसरे चरण की शुरूआत 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक उज्जैन में की गई है। जिला मुख्यालय की तहसील में अभियान को गति दी गई है। इसमें रविवार को हेलीकाप्टर से चलाए गए अभियान में पूरे प्रयास के बावजूद नीलगाय की चालाकी से निराशा हाथ आई है।झूंड में आई,वापसी में बिखरी-शनिवार को अभियान को हेलीकाप्टर के पायलट को डीजीसीए के नार्मस के तहत रेस्ट के कारण विराम देना पडा था जिसमें बोमा को व्यवस्थित कर लगाने का काम किया गया था। रविवार को अभियान के तहत हेलीकाप्टर ने उडान भरी और क्षेत्र में कई जगह झूंडों में मौजूद नीलगायों को घेरा गया। हेलीकाप्टर की पहली घेरा बंदी में तो नीलगाय झूंड के झूंड बोमा की और दौड पडी लेकिन बोमा के प्रथम चरण में आने के बाद चालाक नीलगायों ने पलटी मार दी और एक दो नीलगायों ने जब पलटकर विपरित दिशा में दौडना शुरू किया तो शेष ने भी उनका अनुसरण किया। बोमा में अंदर झूंड के रूप में आने वाली नीलगाय वापसी में तितर-बितर हो गई और मात्र एक दो के रूप में दुर कई किलोमीटर तक जा पहुंची।नीलगाय एवं कृष्णमृगों के स्वभाव में अंतर-मुख्य वन संरक्षक उज्जैन डा.किरण बिसेन ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि कृष्णमृग और नीलगाय के स्वभाव में काफी अंतर होता है। उन्होंने बताया कि अभियान के शुरूआत में हेलीकाप्टर से घेराबंदी के तहत दहाई की संख्या में नीलगाय अंदर आई थी कुछ अंदर आने के उपरांत तत्काल ही झूंड ने पलटी मार दी और विपरित दिशा की और दौड लगा दी। डा.बिसेन के अनुसार नीलगाय के अलग ही स्वभाव इस दौरान नोटिस किया गया है। पहले बोमा में एंट्री एवं उसके बाद आकस्मिक बेक किया गया। संभवत:पिछले समय चलाए गए अभियान के तहत लोकेशन की स्थिति से उसे सतर्कता का ध्यान रहा हो।एक बार फिर एरियल सर्वे-डा. बिसेन के अनुसार अभियान में रविवार को पहले दिन हेलीकाप्टर की मदद से एक नर एवं एक मादा नीलगाय ही बोमा से पकडे जा सके हैं। इस स्थिति को देखते हुए बोमा की लोकेशन परिवर्तित करने के लिए नए सिरे से हेलीकाप्टर से सर्वे किया गया है। सर्वे के अनुसार नए सिरे से बोमा लगाने के काम को अंजाम दिया जा रहा है। सोमवार को अभियान में फिर से नीलगाय को पकडने का प्रयास जारी रहेगा।

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