आखिरकार कब होगा आईडीए अध्यक्ष का फैसला दिग्गजों की आपसी लड़ाई के कारण लगातार हो रही परेशानी

इन्दौर। इन्दौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष का फैसला अटक गया है। लंबे समय से इसके लिए कोशिश हो रही है लेकिन बात नहीं बन पाई है। दिग्गजों की आपसी लड़ाई का नतीजा यह दिख रहा है कि संगठन और सरकार कोई भी फैसला नहीं करना चाह रही है।    उल्लेखनीय है कि जयपालसिंह चावड़ा को आईडीए अध्यक्ष पद से हटाने के बाद नए अध्यक्ष की कवायद तब से ही चल रही थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। माना जा रहा था कि मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनते ही इसका फैसला हो जाएगा, लेकिन कहानी बढ़ते बढ़ते ढाई साल के पार पहुंच गई और ऐसा लगा कि अब अंतिम निर्णय कब होगा। असल में दावेदारों की कमी नहीं है। इन्दौर में युवाओं के बीच लंबी लड़ाई दिख रही है। इतना ही नहीं युवाओं में टीनू जैन, मुकेश राजावत के साथ अन्य नामसुर्खियों में है।    तीनों ही राजनीति में बड़े नेताओं से ताल्लुकात रखे हुए है और उनके लिए पैरवी भी की जा रही है। सबसे पहले टीनू जैन का नाम है जिनके लिए भोपाल, दिल्ली एकजुट है। फिर मोहित वर्मा का नाम है जिनपर भी विधानसभा अध्यक्ष नरेन्दद्रसिंह तोमर का हाथहै।  साथ ही और भी कहीं ऐसे नेट है जो कोशिश में है कि युवाओं क मौका मिल जाए। युवाओं के बा पूर्व विधायकों की लिस्ट भी दौड पड़ी जिसमें जीतू जिराती, सुदर्शन गुप्ता और गोपी नेमा का नाम शाम आया। तीनों ही विधायक रहने के साथ संगठन के लिए लंबे समय म काम कर रहे है और ये कोशिक कर रहे है कि उन्हें भी कुर्सी मिल जाए। परन्तु अब यह लग नहीं रह है कि लड़ाई आसान है।सबसे बड़ी बात यह है कि इनके पीछे सत्ता और संगठन क हाथ मजबूत दिख रहा है।  एक बड़ा नाम हरिनारायण यादव का है। जिन्हें आज तक भाजपा बड़ा पद नहीं दिया है। वजह य है कि उनके लिए कोई ऐसा नेता चाहिए मिलजुलकर मिलाकर विरोध कर सकें। यादव के ना पर सत्ता और संगठन भी राजी हो सकता क्योंकि उनकी जो नजदीकियां बनी है उसम मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का भी  योगदान है। ऐसे में देखना यह है कि फैसला कब होता है और लाटरी किसकी लगती है।
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