उज्जैन। शाजापुर जिले में एक बार फिर से बोमा पद्धति से वन्यजीवों को पकडने का अभियान शुरू किया गया है। शनिवार से कृष्णमृग एवं नीलगाय पकडने के लिए दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञो का दल आ चुका है। बोमा लगाया जा चुका है। इसके पूर्व क्षेत्र के ग्रामीणों को कलेक्टर ऋजु बाफना एवं वन विभाग की नोडल अधिकारी एवं मुख्य वन संरक्षक उज्जैन डा.किरण बिसेन ने अभियान के दौरान क्षेत्र के ग्रामीणों से सहयोग मांगते हुए सावधानी बरतने की हिदायत दी है। इस बार अभियान में 2 हजार कृष्णमृग एवं अधिकतम नीलगाय पकडे जाने का लक्ष्य है।मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा शाजापुर जिले के चिन्हित क्षेत्रों में 09 से 31 अक्टूबर 2026 तक कृष्णमृग एवं नीलगाय के रेस्क्यू एवं ट्रांसलोकेशन का अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के दौरान प्रशिक्षित वन अमला, पशु चिकित्सा एवं विशेषज्ञ दल तथा आवश्यकतानुसार हेलीकॉप्टर एवं अन्य संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित रूप से निर्धारित क्षेत्रों में स्थानांतरित करना है। इस दौरान वन्यजीवों एवं ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
ग्रामीण सुरक्षा निर्देशों का पालन करें-कलेक्टर सुश्री ऋजु बाफना ने जिले के ग्रामीणों से अपील की है कि अभियान के दौरान वन विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करें। ऑपरेशन की सूचना वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें तथा अभियान समाप्त होने की सूचना मिलने तक खेतों में कृषि कार्य, सिंचाई एवं अन्य गतिविधियां न करें। बच्चों को खेतों, सड़कों, बोमा स्थल एवं वन्यजीवों की संभावित आवाजाही वाले क्षेत्रों से दूर रखें। पालतू पशुओं को खुले में न छोड़ें तथा वन्यजीवों को देखने के लिए भीड़ एकत्रित न करें।
उन्होंने ग्रामीणों से कहा है कि वन्यजीवों का पीछा न करें, उन्हें घेरने, रास्ता रोकने अथवा भगाने का प्रयास न करें। हेलीकॉप्टर की आवाज सुनकर बाहर न निकलें तथा निर्धारित सुरक्षा क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश न करें। ग्रामीण अभियान के दौरान वन विभाग, पुलिस, ग्राम पंचायत एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन कर अभियान को सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने में सहयोग करें।
बोमा लगा,विशेषज्ञ पहुंचे-मुख्य वन संरक्षक डा. बिसेन के अनुसार शनिवार से इस बडे आपरेशन की शुरूआत की जा रही है।अभियान के तहत पहला बोमा शुजालपुर के बोलाईकलां में लगाया गया है। अभियान के लिए हेलीकाप्टर भोपाल से देर शाम पहुंचेगा। दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों का दल अभियान स्थल पर आ चुका है। उनके साथ ही स्थानीय जिलों के वन विभाग अधिकारियों एवं कर्मचारियों की टीम सहयोगी रहेगी।
ग्रामीण ऐसे सहयोग करें-
डा. बिसेन ने ग्रामीणों से सहयोग अपेक्षा के रूप में कहा कि ऑपरेशन की सूचना वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें। कृषि कार्य, सिंचाई एवं अन्य गतिविधियां ऑपरेशन समाप्त होने की सूचना मिलने के बाद ही शुरू करें। अपने पालतू जानवरों कुत्ते, गाय, भैंस, बकरी आदि को खुले में न छोड़ें। बच्चों को खेतों, सड़कों, बोमा स्थल एवं वन्यजीवों की संभावित आवाजाही वाले क्षेत्रों से दूर रखें। वन्यजीवों को देखने, फोटो या वीडियो बनाने के लिए एकत्रित न हों। वन्यजीवों का पीछा न करें, उन्हें घेरें नहीं, रास्ता न रोकें, न हांकें और न ही पत्थर या डंडे से भगाएं।ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल, कार आदि से वन्यजीवों का पीछा न करें तथा ऑपरेशन क्षेत्र या उनके संभावित मार्ग में वाहन खड़ा न करें। हेलीकॉप्टर की आवाज सुनकर बाहर न निकलें। निर्धारित सुरक्षा क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश न करें। निजी या अनधिकृत ड्रोन से हेलीकॉप्टर संचालन एवं वन्यजीवों को गंभीर जोखिम हो सकता है। हॉर्न, लाउडस्पीकर, पटाखे, सीटी बजाने, चिल्लाने तथा आग जलाने जैसी गतिविधियां न करें। वन विभाग या पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड, रस्सी एवं सुरक्षा घेरे का पालन करें। वन्यजीवों की लोकेशन, बोमा स्थल, हेलीकॉप्टर की गतिविधि या GPS लोकेशन सोशल मीडिया एवं WhatsApp पर साझा न करें।वन्यजीवों को परेशान न करें तथा तुरंत निकटतम वन विभाग के कर्मचारी या अधिकारी को सूचित करें।
डा.राजौरा की निगरानी में पुरा अभियान-नोडल अधिकारी डॉ. बिसेन ने बताया कि उक्त अभियान की निगरानी प्रदेश स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है। इसमें प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभीरक्षक डॉ. समिता राजौरा, अपर प्रधान मुख्य वन समकक्ष (वन्य जीव) श्री एल कृष्णमूर्ति सहित 07 वनमंडलाधिकारी शामिल है।