इन्दौर। दो नंबर के पार्षद जीतू यादव की वापसी को लेकर अब सामाजिक लड़ाई भी छिड़ गई है और सिंधी समाज बेहद नाराज दिख रहा है। जीतू को वापस लेने पर उन्होंने भाजपा के खिलाफ अंदर ही अंदर बिगुल बजाने का मन बना लिया है। उल्लेखनीय है कि तकरीबन डेढ़ साल पहले भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर पर जीतू यादव के समर्थकों ने धावा बोल दिया था, जिसमें कालरा के नाबालिंग बच्चे के कपड़े उतार दिए थे। वीडियो वायरल होने के बाद विरोध के सुर उठ गए थे। जूनी इन्दौर पुलिस ने 27 मुलजिमों के खिलाफ केस दर्ज किया था जिसमें से 21 के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। छह अभी भी फरार है। फरारी में उनके खिलाफ चालान पेश कर दिया है। बताते है कि जीतू यादव को पिछले दिनों विधायक रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला और नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की कोशिशके बाद वापस ले लिया था। यादव की वापसी के बाद माहौल बिगड़ने लगा है। एक तरफ विधायक रमेश मेंदोला जीतू को एमआईसी में वापस लाने के लिए अड़ गए है। उन्होंने इन्दौर से भोपाल तक एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। महापौर और भाजपा का प्रदेश संगठन वापसी को लेकर राजी हो गया है लेकिन एमआईसी को लेकर नाराज है क्योंकि जिस पद से बेदखल किया गया था उसको लेकर वापस दे दिया जाएगा तो पार्टी को नुकसान होगा। सिंधी समाज भाजपा का बड़ा वोट बैंक माना जाता है और जीतू यादव की वापसी के बाद समाज में भी नाराजगी दिखाई दे रही है। ऐसे संकेत मिले है कि नगर निगम और विधानसभा चुनाव में इस बार असर भी दिख सकता है।
पिछले कई दिनों से अंदर ही अंदर विरोध के स्वर दिख रहे है। कालरा ने भी ये कह दिया है कि जीतू यादव की वापसी पर उनको नाराजगी है। उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को भी चिट्ठी लिख दी है और कहा है किये मानवीय पहलुओं का खून है। मेरे लड़के को परिवार के सामने निर्वस्त्र किया गया था, उसके बावजूद जीतू को पार्टी में ले लिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सिंधी समाज की बेहद नाराजगी सामने आई है और पार्टी भी चिंता में डूब गई है। वजह यही है कि विरोध के स्वर नुकसान दे सकते हैं। कई बातें अंदरूनी तौर पर गंभीर होती जा रही है। चार नंबर भाजपा का गढ़ माना जाता है और उसमें सिंधी समाज का एकतरफा रोल है। इसी वजह से भाजपा का कोई भी यहां खड़ा होता है तो वह जीत जाता है। पिछले 8 चुनावों से भाजपा लगातार यहां जीत रही है। कैलाश विजयवर्गीय ने जीत का परचम लहराया था उसके बाद लक्ष्मणसिंह गौड़ तीन बार चुनाव जीते थे और मालिनी गौड़ चार बार चुनाव जीत चुकी है।