सुपारी किलिंग के आरोपी शाद कीसुप्रीम कोर्ट ने  जमानत रद्द की : समाजसेवी अरोरा पर हुआ था कातिलाना हमला

नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच जिले में सनसनी फैला देने वाले बहुचर्चित फायरिंग और ‘सुपारी किलिंग’  के मामले में देश सर्वोच्च न्यायालय ने  कड़ा फैसला सुनाया है। समाजसेवी अशोक अरोरा गंगानगर पर हुए कातिलाना हमले और अंधाधुंध फायरिंग के मुख्य आरोपी शाद उर्फ शाहिद मंसूरी की जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह से खारिज करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने आरोपी को तुरंत सरेंडर करने का आदेश दिया है।  4 फरवरी 2024:की इस घटना मे , जब नीमच केंट थाना क्षेत्र के अंतर्गत सरेआम  गोलिबारी की थी  । सुपारी किलर शाद उर्फ शाहिद और उसके साथियों ने ताबड़तोड़  फायरिंग और प्राणघातक हमले में अपने ही साथी शूटरों ने ढाई फीट दूर से गोली मारकर बाबू फकीर की हत्या कर दी थी l जबकि इस हाई-प्रोफाइल मामले में समाजसेवी अशोक अरोरा को निशाना बनाया गया था। इस दुस्साहसिक वारदात ने सनसनी फैला दी थी।  मामले में आरोपी शाद उर्फ शाहिद को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कड़ा रुख अपनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में  कहा कि यह मामला साधारण मारपीट का नहीं, बल्कि ‘सुपारी किलिंग’ और एक शातिर अपराधी द्वारा अंजाम दिया गया गंभीर कृत्य है। अदालत ने माना कि हाईकोर्ट ने अन्य सह-आरोपी की समरूपता  का गलत हवाला देकर आरोपी को जमानत दे दी थी, जो कि चार्जशीट और जांच अधिकारियों द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के बिल्कुल विपरीत है।  सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की नजाकत और गवाहों के अभी परीक्षण बाकी होने के मध्यनजर आदेश दिया है कि आरोपी शाद उर्फ शाहिद मंसूरी को आज से दो सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण  करना होगा। शीर्ष अदालत के इस कड़े फैसले से अपराधियों और उनके संरक्षकों में हड़कंप मच गया है, वहीं न्याय की उम्मीद लगाए बैठे पीड़ित पक्ष को बड़ी राहत मिली है।
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