उज्जैन । सिंहस्थ के पूर्व दतान हवाई पट्टी पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट आकार लेने की योजना धरातल पर उज्जैन एवं देवास के उद्योगों के लिए सौगात लेकर उतरने वाली है। अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय कार्गो सुविधा के लिए भी प्रयास तेज हो चुके हैं और एयरपोर्ट के साथ कार्गो की अनुमति एवं सुविधा मिलने से विक्रम उद्योगपुरी एवं देवास का औद्योगिक क्षेत्र भरपूर लाभांवित होंगे।
विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा के साथ अगर अंतर्राष्ट्रीय कार्गो की सुविधा मिलेगी तो ऐसे में दताना हवाई अड्डा से सर्वाधिक लाभ औद्योगिक इकाईयों को होगा। इसके साथ ही अन्य नागरिक लाभ तो मिलना ही है। वर्तमान में दताना-मताना क्षेत्र में बोइंग श्रेणी के विमानों की उड़ान का हवाई अड्डा यहां बनाया जाना प्रस्तावित है।इसके लिए करीब 400 एकड़ जमीन अधिग्रहण की तैयारी की जा रही है। इसका रनवे 3600 से 4000मीटर लंबा रहेगा।अंतर्राष्ट्रीय कार्गो के प्रयास-
सूत्रों का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के साथ उज्जैन में अंतर्राष्ट्रीय कार्गो भी शुरू किया जाए। उज्जैन इलाके में आ रही औद्योगिक इकाईयों के लिए यह कार्गो मददगार साबित होगा। एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण, मुआवजा और अन्य स्वीकृतियों के लिए राजधानी से लेकर उज्जैन के अधिकारी सतत प्रयासरत हैं। ये मामला अभी पाईप लाईन में ही बताया जा रहा है।
ये लाभ होगा कार्गो सुविधा से-
एयर कार्गो, जिसे एयर फ्रेट भी कहा जाता है, का तात्पर्य हवाई मार्ग से माल परिवहन से है। इसमें एयर मेल, एयर फ्रेट और एयर एक्सप्रेस जैसी सेवाएं शामिल हैं और यह वैश्विक स्तर पर तत्काल शिपमेंट भेजने के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। मूल रूप से, हवाई जहाज द्वारा माल ढुलाई में छोटे पार्सल से लेकर विशाल मशीनरी तक, विमान के माध्यम से भेजे जाने वाले सभी प्रकार के सामान शामिल होते हैं। यह उन उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो त्वरित और समयबद्ध डिलेवरी पर निर्भर करते हैं। घरेलू हवाई माल ढुलाई के लिए कुशल और सुरक्षित कार्गो प्रबंधन प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है। आधुनिक बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी-आधारित प्रक्रियाओं के साथ, यह टर्मिनल कई एयरलाइनों के लिए कार्गो की सुचारू स्वीकृति, पृथक्करण, भंडारण और प्रेषण सुनिश्चित करता है। अधिग्रहण की प्रक्रिया –
सिंहस्थ-2028 में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत प्रशासन इस और तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसके चलते उज्जैन-देवास मार्ग पर स्थित दताना-मताना क्षेत्र में प्रस्तावित एयरपोर्ट को लेकर सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के बीच 1 नवंबर 2025 को मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर एमओयू साइन किया गया था। इस समझौते के तहत 45 करोड की प्रारंभिक राशि एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया को दी जा चुकी है। इसके बाद तकनीकी प्रक्रिया शुरू हुई और मिट्टी परीक्षण भी कराया गया। शुरुआती योजना के अनुसार रनवे 1800 मीटर का होना था, लेकिन अब इसे दोगुना कर 3600 से 4000 मीटर करने का प्रस्ताव है, ताकि बोइंग सी-20 जैसे बड़े विमानों का संचालन संभव हो सके। इसके बनने से उज्जैन की इंदौर पर निर्भरता खत्म होगी और पर्यटन के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। जमीन अधिग्रहण को लेकर गतिविधि तेज हो चुकी है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर का होगा हवाई अड्डा-
उज्जैन के दताना मताना में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे के विस्तार को लेकर भारतीय विमान प्राधिकरण नई दिल्ली के जनरल मैनेजर कॉर्पोरेट कम्यूनिकेशन संदीप झा ने तत्कालीन दौर में बताया था कि वर्ष 2047 तक देश में 400 एयरपोर्ट बनाए जाना हैं वर्तमान में देश में 164 एयरपोर्ट हैं। आगामी समय में उज्जैन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का हवाई अड्डा देंगे। उज्जैन हमारे धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र है।