बाहर सख्ती तो घर में ही गडबडी के हाल हुए स्वास्थ्य विभाग के दो आईएएस ने जांची नब्ज,डाक्टर नदारद मिले -जिला पंचायत सीईओ के बाद एसीएस श्री वर्णवाल भी पहुंचे अस्पताल

 

उज्जैन। स्वास्थ्य विभाग के लिए अजीब स्थिति बन रही है। बाहर हाल सुधारने जाता है तो घर में गडबडी शुरू हो जाती है घर को काबू करता है तो बाहर के हाल बेकाबू हो जाते हैं। गुरूवार को जिला अस्पताल की नब्ज एक कनिष्ठ आईएएस एवं एक वरिष्ठ आईएएस ने जांची है। कनिष्ठ के दौरे में कई डाक्टर नदारद मिले हैं। वहीं वरिष्ठ ने आनलाईन उपस्थिति के बाद रजिस्टर में हस्ताक्षर करने को लेकर सवाल उठाए हैं।जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार एवं नियमावली के साथ उपचार मरीजों को मिले इसके लिए विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। विभाग के दलों को दो दिनों में ही 30 अपंजीकृत अस्पताल एवं क्लिनिक मिले हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा.अशोक पटेल ने शिकायत एवं जांच उपरांत फ्रीगंज के निजी एमपी अस्पताल का पंजीयन निरस्त कर दिया है। अपेंडिक्स के आपरेशन के दौरान मंछामन के अस्पताल जनसेवा नोबल पाली क्लिनिक को सील करवा दिया गया है। इससे जिले में निजी चिकित्सा क्षेत्र में हडकंप मच गया है। इसके विपरित जिला अस्पताल चरक भवन में विभागीय डाक्टरों में अनियंत्रण की स्थिति जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमुट के निरीक्षण में सामने आई है।नदारद चिकित्सकों को नोटिस जारी करने के निर्देश-। जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमट ने गुरुवार को जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल की ओपीडी व्यवस्था और चिकित्सकों के उपस्थिति रजिस्टर उन्होंने देखे थे। निरीक्षण में कई विभागों में चिकित्सक निर्धारित समय पर अनुपस्थित पाए गए। सीईओ ने इस पर नाराजगी व्यक्त की। अनुपस्थित डॉक्टरों का एक दिन का वेतन काटने और कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी चिकित्सकों को सुबह 9 बजे से अस्पताल में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा।सुबह 9 से 2 शाम को 5-6-कुमुठ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और आयुक्त स्वास्थ्य  स्तर से लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं कि सभी चिकित्सक सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे और शाम 5 बजे से 6 बजे तक अस्पताल में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। इसके बावजूद लापरवाही सामने आ रही है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी कई बार चिकित्सकों को इस संबंध में चेतावनी दी जा चुकी है और कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।वार्डों में पहुंच कर जाने हाल-निरीक्षण के दौरान सीईओ ने अस्पताल में वार्डों का भी दौरा किया और साफ-सफाई, मरीजों की सुविधा, रिकॉर्ड व्यवस्था तथा चिकित्सकीय सेवाओं की समीक्षा की। उन्होंने अस्पताल की लिफ्टों की व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा की।आनलाईन व्यवस्था तो रजिस्ट्रर में इंट्री क्यों-गुरूवार को ही एसीएस स्वास्थ्य अशोक बर्णवाल ने चरक भवन का निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इस उन्होंने ऑनलाइन कार्यप्रणाली को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध होने पर अनावश्यक रजिस्टर एंट्री से कार्यभार नहीं बढ़ाया जाए। उन्होंने  निर्देश दिए कि एएनसी जांच एएनएम के माध्यम से कराई जाए और हाई-रिस्क मामलों को तत्काल चिकित्सकों तक पहुंचाया जाए।उन्होंने अस्पताल परिसर के फर्श और अन्य व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। दवा भंडारण कक्ष के निरीक्षण में उन्होंने प्रत्येक माह की दिवस वार जानकारी अपडेट रखने, दवाइयों को अल्फाबेटिकल क्रम में व्यवस्थित करने तथा नियमित उपयोग वाली दवाओं के स्टॉक की सतत जानकारी रखने ,दवा भंडारण की समस्त जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने और ऑनलाइन किए गए कार्य को रजिस्टर में दोबारा दर्ज कर कर्मचारियों पर अनावश्यक भार न डालने के निर्देश दिए। ब्लड बैंक का निरीक्षण करते हुए उन्होंने विभिन्न ब्लड यूनिट की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने ब्लड सैंपल कलेक्शन प्रक्रिया की समीक्षा की और मरीजों को चिकित्सा लाभ देने के साथ सभी का आभा आईडी बनाने के निर्देश दिए।उन्होंने पीआईसीयू वार्ड और शिशु वार्ड का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कूमुट,सीएमएचओ डॉ.अशोक कुमार पटेल सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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