नई दिल्ली। जातीय जनगणना से पहले केंद्र सरकार जातियों की सूची बनाएगी, ताकि सुनियोजित डेटा जमा हो। जातियों पर राजनीतिक सहमति के लिए इसे सर्वदलीय बैठक में भी रखा जाएगा। राजनीतिक दलों के सुझावों-आपत्तियों के आधार पर सूची फाइनल होगी। गृह मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की हाल में हुई बैठक में यह तय हुआ। जातीय जनगणना के लिए सामाजिक न्याय मंत्रालय समन्वयक रहेगा। जातियों की मान्य सूची जरूरी है, क्योंकि अनुसूचित जाति और जनजाति तो गिनती में हैं। लेकिन अन्य पिछड़े वर्ग की जातियों पर असमंजस है। देश में जनगणना की प्रक्रिया 2026 में शुरू होने की संभावना है।
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