उज्जैन। महाकाल नगरी में ऑटो और ई-रिक्शा चालकों की मनमानी एक बार फिर बढ़ने लगी है। रेलवे स्टेशन, देवास गेट और महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र में यात्रियों को निर्धारित किराए पर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए प्रीपेड बूथ अब अधिकांश स्थानों पर बंद पड़े हैं। कई बूथों पर ताले लटके हैं, जबकि बाहर लगी किराया सूची (रेट लिस्ट) भी हटा दी गई या मिटा दी गई है। इसका सीधा नुकसान बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को उठाना पड़ रहा है, जिनसे मनमाना किराया वसूला जा रहा है।
सावन माह में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से ऑटो व ई-रिक्शा के माध्यम से महाकाल मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों तक पहुंचते हैं। लेकिन प्रीपेड व्यवस्था कमजोर पड़ने के बाद कई चालक महाकाल मंदिर तक पहुंचाने के लिए 150 से 200 रुपये तक किराया वसूल रहे हैं, जबकि निर्धारित किराया इससे काफी कम है।
कुछ समय पहले यातायात विभाग ने रेलवे स्टेशन, देवास गेट और अन्य प्रमुख स्थानों पर प्रीपेड बूथ शुरू कर किराया सूची भी सार्वजनिक की थी। इससे यात्रियों को रसीद के साथ निर्धारित किराए पर यात्रा की सुविधा मिल रही थी और चालकों की मनमानी पर अंकुश लगा था। वर्तमान में बूथ बंद होने और रेट लिस्ट हट जाने से यह व्यवस्था लगभग कमजोर हो गई है। इसका लाभ उठाकर कई चालक फिर से मनमाना किराया वसूल रहे हैं।
बाहर से दर्शन के लिए आने वाली सवारियों को ही प्राथमिकता
शहर में ऑटो और ई-रिक्शा की संख्या पर्याप्त होने के बावजूद कई चालक केवल महाकाल मंदिर और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों की सवारी लेने में रुचि दिखा रहे हैं। शहर के अन्य क्षेत्रों में जाने वाले यात्रियों को अक्सर वाहन नहीं मिलते या चालक जाने से मना कर देते हैं। इससे स्थानीय नागरिकों और सामान्य यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
होटलों से कमीशन के कारण बाहर के यात्रियों पर ज्यादा फोकस
कुछ लोगों का कहना है कि कई ऑटो और ई-रिक्शा चालक बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को होटल तक पहुंचाने पर होटल संचालकों से कमीशन प्राप्त करते हैं। यही कारण है कि चालक बाहरी यात्रियों को प्राथमिकता देते हैं। इससे उन्हें किराए के साथ अतिरिक्त आय भी हो जाती है, जबकि स्थानीय यात्रियों की अनदेखी की जा रही है। इस संबंध में कई लोगों ने प्रशासन से शिकायत भी की है।