उज्जैन। हेलीकाप्टर एरियल से ब्रजराजखेडी की बजाय केसूनी में बोमा की लोकेशन का निर्णय वन विभाग के लिए सफलता लेकर आया है। विभाग ने सोमवार को रेकार्ड कायम करते हुए एक साथ 121 नीलगाय को पकडने की सफलता हासिल की है। पहली बार इतनी संख्या में नीलगाय पकडी गई है। नीलगायों ने जमकर वाहनों में उधम मचाया है। पशु चिकित्सकों की मदद से उन्हें वाहन में काबू किया गया ।एक दिन पूर्व की अपेक्षा सोमवार को वन विभाग ने बोमा की स्थिति बदल दी थी। इस बार बोमा केसूनी गांव के जंगल में लगाया गया था। दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञ दल एवं हेलीकाप्टर के पायलट के साथ वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से नीलगायों को पकडने का सीधा शतक मारा है। कृष्णमृगों एवं नीलगाय को पकडने के जारी अभियान का दुसरा चरण उज्जैन में जारी है। 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक यह दुसरा चरण रहेगा।अब तक 217 नीलगाय –मुख्य वन संरक्षक डा.किरण बिसेन ने बताया कि शाजापुर में अभियान के प्रथम चरण में 1500 कृष्णमृग एवं 94 नीलगाय का रेस्क्यू किया गया था। इसकी अपेक्षा उज्जैन में दुसरे चरण के दुसरे दिन ग्राम केसुनी में कुल 121 वन्यजीवों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया,जिनमें 120 नीलगाय एवं 1 कृष्णमृग (ब्लैकबक) शामिल हैं। । अब तक कुल 217 नीलगाय पकडी गई हैं। नीलगायों को वन्य जीवों के लिए विशेष रूप से बने वाहनों में पशु चिकित्सकों के साथ गांधीसागर वन्यजीव अभ्यारण्य भेजा गया है वहां इन्हें छोडा जाएगा। डा. बिसेन ने बताया कि कृष्ण मृगों की अपेक्षा नीलगाय अलग तरह का शक्तिशाली एवं अति सजग वन्यजीव है। ऐसे में एक साथ इतनी संख्या में पकडे जाने के बाद वाहनों में इन्होंने उधम मचा दिया जिसे पशु चिकित्सकों के परामर्श के साथ नियंत्रित किया गया। वाहनों में विशेष व्यवस्था होने के कारण इनकी गतिविधि को वाहन चालक के केबिन में पूरी तरह से नोट किया जा सकता है। इस बार बोमा के लिए चयनित स्थल पर पर्याप्त प्राकृतिक वनस्पति आवरण उपलब्ध था, जिससे नीलगायों को स्थापित बोमा संरचना सीधे दिखाई नहीं दी और वे स्वाभाविक रूप से निर्धारित मार्ग से हाका लगाने पर बोमा की ओर अग्रसर होती रही।राजस्थान के अधिकारीयों ने प्रक्रिया देखी -भारत में पहली बार बोमा पद्धति का उपयोग शाजापुर एवं उज्जैन में किया जा रहा है। सोमवार को अभियान स्थल पर राजस्थान के मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक सहित राजस्थान कैडर के दो भारतीय वन सेवा अधिकारियों ने भ्रमण किया। उन्होंने हेलीकॉप्टर की सहायता से संचालित बोमा तकनीक की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अवलोकन किया तथा रेस्क्यू प्रक्रिया का अनुभव प्राप्त किया।इस दौरान राजस्थान के अधिकारियों ने हेलीकॉप्टर के माध्यम से वन्यजीवों की हर्डिंग, बोमा संरचना में उनके प्रवेश तथा सुरक्षित रेस्क्यू की प्रक्रिया के संबंध में दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञ संस्था कंजर्वेशन सॉल्यूशंस की टीम, मध्यप्रदेश वन विभाग के अधिकारियों एवं मैदानी अमले से विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की।कृषकों में हर्ष-वन विभाग के पहले दिन हताशा पूर्ण परिणाम से नीलगाय से परेशान किसान भी हताश हो गए थे। सोमवार को लोकेशन तब्दीली के साथ सामने आए परिणाम से कृषकों ने राहत की सांस लेते हुए हर्ष जताया है। किसानों को पहले दिन के परिणाम से लगने लगा था कि उनकी समस्या का निदान नहीं हो सकेगा। दुसरे दिन कृषकों ने जमकर वन विभाग का सहयोग भी किया और सफलता हाथ आने पर हर्ष भी जताया है। इस सफलता के बाद जिले के अन्य क्षेत्रों में भी बोमा से नीलगाय को पकडने की किसान अपेक्षा जता रहे हैं। भारतीय किसान संघ पिछले कई वर्षों से इस समस्या से किसानों को निजात दिलाने की मांग करता रहा है। उसके वार्षिक ज्ञापन में यह स्थायी समस्या शामिल रही है।