भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (SEIAA) अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को नया पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में कहा गया है कि प्राधिकरण के कामकाज में बाधाएं पैदा की जा रही हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने और पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की है।यह विवाद पर्यावरणीय मंजूरियों को लेकर गहराया है।चार दिनों बाद भी मामले में सरकार ने अपना रूख साफ नहीं किया है।
इस मामले में सामने आ रहा है कि विवाद की जड़ 237 परियोजनाओं को कथित तौर पर दी गई ‘डीम्ड पर्यावरण मंजूरी’ है। अध्यक्ष ने पहले भी इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अब मुख्य सचिव को लिखे नए पत्र में उन्होंने प्राधिकरण के पोर्टल, बैठकों और कर्मचारियों की पदस्थापना से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। अध्यक्ष ने राज्य और केंद्र सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। संबंधित अधिकारियों के निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, कथित आपराधिक कृत्यों और संबंधित अभिलेखों की CBI जांच कराने की मांग भी की है। 16 अक्टूबर को लिखे पत्र पर पिछले 4 दिनों में अब तक सरकार ने अपना रूख साफ नहीं किया है।
कामकाज बाधित करने का आरोप-
पत्र में अध्यक्ष ने विभागीय अपर मुख्य सचिव अनिरुद्ध मुखर्जीऔर SEIAA के सदस्य सचिव हर्ष पंचोली का उल्लेख करते हुए लिखा है कि संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल में प्राधिकरण का काम प्रभावित हुआ। पर्यावरण कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के उल्लंघन का दावा भी किया गया है। चौहान ने संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने का भी अनुरोध किया है। सिया अध्यक्ष के आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना शेष है।
3 माह से पोर्टल बंद होने का दावा-
अध्यक्ष ने SEIAA के ऑनलाइन पोर्टल की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। पत्र के मुताबिक, पोर्टल करीब तीन महीने से बंद है। इससे प्राधिकरण के कामकाज पर असर पड़ने का दावा किया गया है। चौहान ने आरोप लगाया कि काम की जानकारी रखने वाले कर्मचारियों को हटाया गया।उनकी जगह दूसरे अनुभवहीन कर्मचारियों को पदस्थ किया गया। इनमें एक गंभीर रोग का शिकार है।पत्र में कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने और बार-बार बदलाव का भी उल्लेख है। अध्यक्ष का दावा है कि एक साल में 20 से अधिक बार कर्मचारियों में बदलाव किया गया।
बैठकें, मंजूरी पत्र में देरी की शिकायत-
पत्र में SEIAA की बैठकों को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। अध्यक्ष के अनुसार, बैठकें नियमित रूप से नहीं हो रही हैं। उन्हें बार-बार पुनर्निर्धारित किया जाता है। बैठक की कार्यवाही का विवरण यानी मिनट्स ऑफ मीटिंग (MoM) भी समय पर तैयार नहीं होने का आरोप है। चौहान ने यह भी दावा किया कि पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद संबंधित पत्र जारी करने में देरी होती है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए बैठक के रिकॉर्ड, पोर्टल की स्थिति और मंजूरी संबंधी दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी।
बगैर प्रावधान 237 डीम्ड मंजूरी का विवाद –
SEIAA में विवाद का एक प्रमुख मुद्दा 237 परियोजनाओं को बीते साल दी गई डीम्ड पर्यावरण मंजूरी है। अध्यक्ष की आपत्ति के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। प्रकरण में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और पर्यावरण मंत्रालय ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि पर्यावरण नियमों में ‘डीम्ड एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस’ देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए। केंद्र सरकार के इस खुलासे के बाद प्रदेश के कुछ आईएएस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। बताया जाता है कि इन्होंने एक दिन में ही यह अनुमतियां जारी कर दी थीं।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, अब प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर
237 परियोजनाओं की मंजूरी का विवाद पहले ही कानूनी स्तर तक पहुंच चुका है। अब SEIAA अध्यक्ष के नए पत्र ने प्राधिकरण के प्रशासनिक कामकाज को भी बहस के केंद्र में ला दिया है। चौहान ने पत्र में आरोप लगाया है कि पर्यावरण कानून और विधिक प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्राधिकरण के काम में जानबूझकर बाधाएं पैदा की जा रही हैं।
3 माह पहले सील कर दिया था दफ्तर
करीब तीन माह पूर्व गत 14 जुलाई को SEIAA चेयरमैन के कार्यालय को अचानक सील कर दिया गया था। वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद देर शाम कार्यालय खोल दिया गया।बाद में दफ्तर सील किए जाने का कारण बिजली का फॉल्ट बताया गया।
कौन हैं सिया अध्यक्ष चौहान-
कभी नगर निगम उज्जैन के आयुक्त रहे श्री चौहान राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे। वर्ष 2013 में आईएएस अवार्ड मिला। 2017 में सेवानिवृत्त हुए। भाजपा में शामिल होकर 2018 विधानसभा चुनाव के घोषणा-पत्र समिति के सदस्य रहे। 7 जनवरी 2025 को केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने इन्हें 3 साल के लिए सिया अध्यक्ष नियुक्त किया है। श्री चौहान इन दिनों 237 फर्जी पर्यावरण क्लीयरेंस घोटाले को उजागर करने को लेकर चर्चा में हैं। अधिकारियों ने नियमों के खिलाफ 237 क्लीयरेंस जारी कर दी,जिससे 17 एकड जंगल कट गया।