भक्तों ने महाकाल के चार स्वरूपों में दर्शन किए -पर्यावरण संदेश के साथ श्रद्धालुओं को वितरित किए पौधे

उज्जैन। श्रावण मास के चौथे एवं अंतिम सोमवार पर भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी में भगवान के चार रूपों के दर्शन श्रद्धालुओं ने किए हैं। इसके साथ ही सवारी के दौरान मंदिर प्रबंध समिति एवं प्रशासन ने पर्यावरण का संदेश देते हुए श्रद्धालुओं को 11 हजार पौधों का वितरण इस दौरान सवारी मार्ग पर किया गया है। सवारी में पालकी में श्री चन्द्रमोलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरूड़ रथ पर श्री शिवताण्डव, नन्दी रथ पर श्री उमा महेश विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले और श्रद्धालुओं को दर्शन दिए।

श्रावण के अंतिम सोमवार पर भगवान श्री महाकालेश्वर के मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की बडी संख्या रही है। सोमवार को भगवान रात 2.30 बजे जगाया गया और उसके उपरांत भस्मार्ती की गई। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के दर्शन का क्रम शुरू हो गया था।सवारी से पूर्व श्री चंद्रमौलेश्वर का पूजन-अपरांह् 4 बजे मंदिर के सभा मंडप में भगवान के श्री चंद्रमौलेश्वर स्वरूप का पूजन किया गया। इसके बाद रजत पालकी में भगवान को सवार कर नगर भ्रमण के लिए निकाला गया। मंदिर के मुख्य द्वार पर पालकी में विराजित भगवान को सशस्त्र गार्ड ने सलामी दी और उसके उपरांत पालकी के आगे-आगे गार्ड की टुकडी परेड करते हुए परंपरागत सवारी मार्ग पर आगे-आगे चले। रामघाट पर पालकी में सवार श्री चंद्रमौलेश्वर का मां शिप्रा के जल से अभिषेक किया गया। इस दौरान दत्त अखाडा घाट से श्री पंच दशनाम जूना अखाडा ने भगवान की आरती की। श्रावण –भादौ मास में भगवान श्री महाकालेश्वर की नगर भ्रमण पर निकलने वाली सवारियों के क्रम की शुरूआत इस वर्ष  3 अगस्त से हुई थी। इस वर्ष कुल 6 सवारियां निकाली जाना है। भादौ मास की शेष दो सवारी क्रमबद्ध आगामी सोमवार को निकाली जाएगी।पौधे वितरण के साथ पर्यावरण संदेश भी-मंदिर प्रबंध समिति के जनसंपर्क अधिकारी आशीष फलवाडिया के अनुसार सावन की चतुर्थ सवारी के अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया गया। सवारी के दौरान समिति द्वारा 11 हजार पौधों का वितरण कर श्रद्धालुओं एवं आमजन को पौधारोपण के लिए प्रेरित किया गया तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया। जनप्रतिनिधियों,समिति , प्रशासनिक –पुलिस अधिकारियों ने पौधों का वितरण इस दौरान किया।अभियान के माध्यम से “प्रकृति की रक्षा, महाकाल की सच्ची भक्ति” का संदेश दिया गया श्रद्धालुओं से प्लास्टिक का त्याग करने, एक पेड़ लगाने, मां शिप्रा को स्वच्छ रखने तथा निर्माल्य नदी में न डालकर निर्धारित पात्र में डालने की अपील भी इस दौरान की गई। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने संदेश दिया कि “आस्था भी, स्वच्छता भी—यही महाकाल की सेवा है”। साथ ही “जल है तो कल है, नदी है तो जीवन है” एवं “महाकाल के भक्त बनें, प्रकृति के रक्षक बनें” के संदेश के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का भाव जागृत किया गया।

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