*गांधी नगर में पंडाल विवाद ने पकड़ा कानूनी तूल, गोलू कुशवाहा पर एफआईआर दर्ज

इंदौर। सड़क पर पंडाल, बाधित आवागमन और कार्रवाई में देरी का मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बन गया है। गांधी नगर क्षेत्र में पंडाल लगाकर रास्ता बाधित करने के मामले में गोलू कुशवाहा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने अदालत को बताया कि पंडाल से 10 फीट रास्ता खुलवा दिया गया है, लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत के सवालों ने पूरे घटनाक्रम में प्रशासन की भूमिका को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया।
 *अनुमति नहीं थी तो पंडाल लगने कैसे दिया?* -मामले की पिछली सुनवाई में शासन की ओर से अदालत को बताया गया था कि पंडाल लगाने की कोई वैध अनुमति जारी नहीं की गई थी। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि जब अनुमति नहीं थी, तो पंडाल कैसे लगाया गया और संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। यही सवाल अब मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। बिना अनुमति आयोजन होने और सार्वजनिक रास्ता बाधित रहने के दौरान जिम्मेदार विभागों की निगरानी कितनी प्रभावी थी, इसका जवाब शासन को देना होगा।
 *डीसीपी को खुद अदालत में देना पड़ा जवाब* –मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने डीसीपी नरेंद्र रावत को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान डीसीपी ने अदालत को बताया कि आयोजक को पहले नोटिस दिया गया था। साथ ही, पंडाल से 10 फीट रास्ता खुलवाने और गोलू कुशवाहा के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी भी दी गई।हालांकि, कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद भी मूल सवाल कायम है कि जब रास्ता बाधित होने की शिकायत थी और आयोजन की वैध अनुमति नहीं थी, तब प्रभावी कार्रवाई में देरी क्यों हुई।
 *हजारों परिवारों की परेशानी बनी याचिका का आधार-याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता चर्चित शास्त्री ने अदालत में बताया कि गांधी नगर क्षेत्र में पंडाल के कारण हजारों परिवारों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। रास्ता बाधित होने का असर स्थानीय व्यापार और रोजमर्रा की आवाजाही पर भी पड़ रहा था।याचिका में कहा गया कि पंडाल के करीब 50 फीट के हिस्से में से कम से कम 8 फीट रास्ता खुला रखने के लिए शासन-प्रशासन से अनुरोध किया गया था, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब पुलिस की ओर से 10 फीट रास्ता खुलवाने की जानकारी दी गई है। ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि समय रहते रास्ता खुलवा दिया जाता, तो स्थानीय लोगों को लंबे समय तक परेशानी क्यों झेलनी पड़ती?
 *दो सप्ताह में जवाब, भविष्य की व्यवस्था पर भी नजर-सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शासन को निर्देश दिए कि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत किया जाए। अदालत के निर्देशों के बाद मामला केवल एक पंडाल और एफआईआर तक सीमित नहीं रह गया है। अब सार्वजनिक मार्गों पर आयोजनों की अनुमति, यातायात बाधित होने पर त्वरित कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।
एफआईआर के बाद अगली परीक्षा प्रशासन की-गोलू कुशवाहा के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना और रास्ता खुलवाया जाना इस मामले में हुई कार्रवाई के प्रमुख घटनाक्रम हैं। लेकिन अब शासन के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि बिना वैध अनुमति के पंडाल लगने की स्थिति कैसे बनी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस व्यवस्था की जाएगी। हाईकोर्ट में शासन के जवाब और आगे होने वाली कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि इस मामले से प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
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