उज्जैन/ आमतौर पर लोग साल में सिर्फ दो नवरात्रों (चैत्र और शारदीय) के बारे में जानते हैं, जहाँ मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा गुप्त काल भी आता है जहाँ 9 नहीं, बल्कि 10 महाशक्तियों को जगाया जाता है? जी हां, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 की शुरुआत 15 जुलाई से होने जा रही है। यह नौ दिन सामान्य भक्तों के लिए जितने गोपनीय हैं, तंत्र-मंत्र और अघोर साधना करने वालों के लिए उतने ही खौफनाक और चमत्कारी शक्तियों से भरे हैं!
तंत्र-मंत्र और अघोरियों की ‘सीक्रेट’ दुनिया
गुप्त नवरात्रि का मतलब ही है ‘छिपी हुई साधना’। इस दौरान दुनिया की नजरों से दूर, अघोरी और तांत्रिक शमशानों, कंदराओं और गुप्त स्थानों पर ऐसी सिद्धियां प्राप्त करते हैं जो आम इंसान की कल्पना से परे हैं। पंडित मुकेश जोशी के अनुसार, इस समय ब्रह्मांड में तांत्रिक ऊर्जा का प्रवाह सबसे तेज होता है। यदि कोई साधक इन दिनों में सही विधि से मंत्र साधना कर ले, तो उसकी असंभव मनोकामनाएं भी चुटकियों में पूरी हो सकती हैं।
नौ नहीं, इन 10 भयानक और सौम्य ‘महाविद्याओं’ की होती है पूजा
शारदीय नवरात्रि की तरह इसमें मां शैलपुत्री या कात्यायनी की सौम्य पूजा नहीं होती। इसमें ब्रह्मांड की सर्वोच्च 10 महाविद्याओं को साधा जाता है, जिनमें से कुछ के रूप बेहद रौद्र और डरावने हैं:
काली और तारा: शमशान की अधिष्ठात्री और संहार की देवियां।
छिन्नमस्ता: अपने ही हाथों से अपना सिर काटने वाली परम जाग्रत शक्ति।
बगलामुखी और धूमावती: शत्रुओं का नाश करने वाली और दरिद्रता के रूप में पूजी जाने वाली रहस्यमयी देवी।
त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, मातंगी और कमलात्मिका: तंत्र की उच्च और ऐश्वर्य देने वाली शक्तियां।
घट स्थापना का सबसे सटीक मुहूर्त
उदयातिथि के नियमों के कारण इस बार की गुप्त नवरात्रि बेहद खास संयोग लेकर आ रही है। पंडितजी के मुताबिक, 15 जुलाई को पुष्य नक्षत्र और हर्षण योग का ऐसा दुर्लभ मेल बन रहा है, जो तंत्र साधना को 100 गुना ज्यादा प्रभावशाली बना देता है।
विशेष आयोजन तारीख और समय
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि आरंभ 15 जुलाई 2026, बुधवार
घट स्थापना शुभ मुहूर्त सुबह 08:02 बजे (पुष्य नक्षत्र और हर्षण योग में)
महाष्टमी/नवमी तिथि 22 जुलाई 2026, बुधवार (समापन)
गुप्त नवरात्रि का महत्व
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि लोगों के बीच ज्यादा प्रचलित नहीं है क्योंकि, इसमें तंत्र मंत्र के साधक अधिक साधना रखते हैं। इस दौरान सामान्य लोग मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करते हैं। वहीं अघोरी, तांत्रिक तंत्र मंत्र और सिद्धि प्राप्त करते हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान पूरी श्रद्धा से दस महाविद्याओं की साधना की जाती है, जिन्हें बहुत शक्तिशाली माना गया है। कहते हैं कि इनकी कृपा प्राप्त होने से जातक के जीवन में आने वाले संकट दूर हो सकते हैं। साथ ही, साधकों को बेहद विशेष फल की प्राप्ति होती है।
सावधानी : पंडितजी का कहना है कि जहां सामान्य लोग इन दिनों में मां दुर्गा की मानसिक पूजा कर सुख-समृद्धि पा सकते हैं, वहीं 10 महाविद्याओं की तांत्रिक साधना बिना किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन के भूलकर भी न करें, क्योंकि इन शक्तियों का क्रोध झेलना किसी आम इंसान के बस की बात नहीं है!