इंदौर। राजनीति में कई बार नेता जो बोलते हैं, उससे ज्यादा चर्चा उन तस्वीरों की होती है, जिनमें वे नजर आते हैं। अहिल्या स्मारक पर एक ही दिन सामने आईं दो अलग-अलग तस्वीरों ने कुछ ऐसा ही सवाल खड़ा कर दिया है।एक ओर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन साथ दिखाई दिए, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ तुलसी सिलावट, महापौर और सांसद शंकर लालवानी नजर आए।
*जगह एक, दिन एक, लेकिन सियासी जमावड़े दो!*-अब इसे महज कार्यक्रमों का संयोग कहें या इंदौर की राजनीति में नेताओं की अलग-अलग मौजूदगी का संकेत? सवाल इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि इन चेहरों की राजनीतिक अहमियत अपने-अपने स्तर पर है।क्या दोनों कार्यक्रमों की अलग-अलग रूपरेखा इसकी वजह थी, या इन तस्वीरों में कोई ऐसा राजनीतिक संदेश भी छिपा है, जिस पर चर्चा होनी चाहिए? फिलहाल उपलब्ध तस्वीरें इन सवालों को जरूर जन्म देती हैंइंदौर की राजनीति में समीकरणों को लेकर चर्चाएं नई नहीं हैं। ऐसे में अहिल्या स्मारक की इन दो तस्वीरों ने एक बार फिर ध्यान खींचा है।सियासत में तस्वीरें भी बोलती हैं, लेकिन उनका मतलब समझने के लिए तस्वीर के पीछे की कहानी जानना जरूरी है। अहिल्या स्मारक से निकला यही सवाल अब चर्चा का विषय है—दो अलग-अलग जमावड़े, आखिर वजह क्या?