इंदौर। शहर में एक तरफ लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ लापरवाही का ऐसा नजारा सामने आया कि देखकर जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो जाएं। विदुर नगर की 60 फीट रोड पर कुछ महीने पहले ही बनी नई सड़क को ड्रेनेज लाइन डालने के लिए खोद दिया गया। रही-सही कसर खुदाई के दौरान नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन फूटने से पूरी हो गई। पाइपलाइन फूटते ही पानी सड़क पर बहने लगा और पूरी कॉलोनी में पानी फैल गया।
नई सड़क बनी थी या खुदाई के लिए छोड़ी थी?
सवाल यह है कि जब सड़क कुछ महीने पहले ही बनाई गई थी, तो ड्रेनेज लाइन डालने का काम पहले क्यों नहीं किया गया? क्या सड़क निर्माण से पहले संबंधित विभागों के बीच कोई तालमेल नहीं था? अगर तालमेल था, तो फिर नई सड़क को दोबारा खोदने की नौबत क्यों आई? जनता की गाढ़ी कमाई से बनी सड़क पर फिर से खुदाई आखिर किसकी योजना का हिस्सा है?एक तरफ जल संकट, दूसरी तरफ पानी की बर्बादी!
शहर के कई इलाकों में लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में नर्मदा की मेन लाइन फूटने से हजारों लीटर पानी सड़क पर बहने लगा। जिस पानी को घरों तक पहुंचना चाहिए था, वह सड़क पर बहकर बर्बाद होता रहा। अब सवाल उठता है कि पाइपलाइन फूटने के बाद उसे दुरुस्त करने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए कितनी तेजी से कार्रवाई की गई?
सवाल यह है कि जब सड़क कुछ महीने पहले ही बनाई गई थी, तो ड्रेनेज लाइन डालने का काम पहले क्यों नहीं किया गया? क्या सड़क निर्माण से पहले संबंधित विभागों के बीच कोई तालमेल नहीं था? अगर तालमेल था, तो फिर नई सड़क को दोबारा खोदने की नौबत क्यों आई? जनता की गाढ़ी कमाई से बनी सड़क पर फिर से खुदाई आखिर किसकी योजना का हिस्सा है?एक तरफ जल संकट, दूसरी तरफ पानी की बर्बादी!
शहर के कई इलाकों में लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में नर्मदा की मेन लाइन फूटने से हजारों लीटर पानी सड़क पर बहने लगा। जिस पानी को घरों तक पहुंचना चाहिए था, वह सड़क पर बहकर बर्बाद होता रहा। अब सवाल उठता है कि पाइपलाइन फूटने के बाद उसे दुरुस्त करने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए कितनी तेजी से कार्रवाई की गई?
नगर निगम के विभागों में तालमेल कौन बैठाएगा?
विदुर नगर की घटना ने नगर निगम के कामकाज और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले सड़क बनाई गई, फिर ड्रेनेज के लिए उसे खोदा गया और अब नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन टूटने से पानी बर्बाद हो रहा है। आखिर इन सबकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या सड़क खोदने से पहले पाइपलाइन की स्थिति की जांच की गई थी? और अगर नहीं, तो इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी? अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर पाइपलाइन की मरम्मत और पानी की बर्बादी रोकने के लिए क्या कदम उठाते हैं, या फिर जनता की सड़क और पानी यूं ही लापरवाही की भेंट चढ़ते रहेंगे।