उज्जैन। पिछले कुछ दिनों से लोगों के मोबाइल हैक होने के बाद खाते से हजारों का ट्रांजेक्शन होने के मामले सामने आ रहे है। अब स्क्रैप व्यवसाई के खाते से 41 हजार का ट्रांजेक्शन हुआ है। ऐसा लगा रहा है कि साइबर अपराधियों ने फ्रॉड का नया तरीका निकाल लिया है।
नीलगंगा थाना क्षेत्र के विष्णुपुरा में रहने वाला नरेन्द्र पिता चंदूलाल अखंड़ स्क्रैप व्यवसाई है। कुछ दिन पहले उसका मोबाइल अचानक हैक हो गया था। स्क्रीन पर कुछ दिखाई नहीं देने पर उसे लगा कि बेटरी डॉन हो गई है। मोबाइल को चार्जिंग पर लगा दिया। सौ प्रतिशत चार्ज होने पर मोबाइल आॅन किया तो मैसेज मिला कि खाते से 41 हजार ट्रांजेक्शन हुआ है। आॅनलाइन फ्रॉड होने का पता चलते ही साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की गई। जहां से मामला नीलगंगा थाना पुलिस के पास पहुंचा। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा 318 (4) भारतीय न्याय संहिता का प्रकरण दर्ज कर जांच में लिया है। पिछले डेढ़ माह में 18 से 20 मामले सामने आ चुके है, जिसमें सभी के द्वारा मोबाइल हैक होने के बाद खाते से हजारों की राशि का ट्रांजेक्शन होने की शिकायत दर्ज कराई है। जिससे लग रहा है कि साइबर फ्रॉड करने वालों ने नया तरीका निकाल लिया है। पूर्व में साइबर अपराधियों द्वारा लोगों के साथ बैंक अधिकारी बनकर उनके खातों की जानकारी प्राप्त कर धोखाधड़ी की जाती थी। उसके बाद डिजीटल अरेस्ट का तरीका निकाल लिया गया था। कभी इनाम का झांसा देकर तो कभी सामान बेचने के नाम पर लोगों के साथ धोखाधड़ी की गई। पुलिस ने बढ़ते साइबर अपराध को लेकर जागरूकता अभियान चला तो बदमाशों ने नया तरीका अपना लिया, उनके द्वारा एपीके फाइल्स भेजी जाने लगी, जिस पर क्लिक करने पर खातों से राशि निकालने के मामले सामने आने लगे। पुलिस ने फिर से जागरूकता अभियान चला तो अब नया तरीका मोबाइल हैक करने का सामने आने लगा है। पुलिस द्वारा अनाधिकृत तरीके से खातों से निकाली जा रही राशि की जानकारी समय से मिलने ट्रांजेक्शन को होल्ड कराकर बैंकों की मदद से वापस लौटाने का काम भी कर रही है। लेकिन देरी होने पर राशि मिल पाना नामुकिन हो रहा है। साइबर फ्रॉड करने वाले काफी शातिर है, जिनका रिकार्ड भी पुलिस को नहीं मिल पा रहा है। जांच के दौरान ऐसे लोग गिरफ्त में आते है, जो चंद रूपयों के लिये अपना खाता किराये पर दे रहे है।
कारोबारी के साथ 5.60 लाख की धोखाधड़ी
आॅनलाइन धोखाधड़ी एक मामला पटनी बाजार में बर्तन कारोबारी महेश पिता मन्नालाल कसेरा के साथ सामने आया। उन्होने ई-कामर्स कंपनी के साथ आॅनलाइन कारोबार की शुरूआत की थी। कुछ समय तक सब ठीक चला, लेकिन बाद में कंपनी ने आॅनलाइन ट्रांजेक्शन बंद कर दिया। करीब 5.60 लाख से अधिक की राशि नहीं मिलने पर धोखाधड़ी का आभास होते ही साइबर हेल्पलाइन नम्बर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई। खाराकुआ पुलिस ने आॅनलाइन शिकायत मिलने पर प्रकरण दर्ज कर जांच में लिया। पुलिस जांच पूरी कर पाती उससे पहले सामने आया कि कारोबारी को उनकी राशि लौटा दी गई है। राशि मिलने पर कारोबारी द्वारा पुलिस से शिकायत वापस लेने की बात कहीं जा रही है।
साइबर अपराधियों का नया तरीका, मोबाइल हैक स्क्रैप व्यवसाई के खाते से 41 हजार का ट्रांजेक्शन