उज्जैन। शहर की सबसे पुरानी और व्यवस्थित कॉलोनी ऋषि नगर का मुख्य प्रवेश मार्ग ही बाधाओं के हाल में आ चुका है। हालत यह है कि यहां दिन के पूरे समय ही अस्थायी अतिक्रमण से यह प्रवेश मार्ग बाधाओं से पटा रहता है। प्रवेश के मुहाने पर बाधा होने से देवास रोड तिराहा पर दुर्घटनाओं की स्थिति बनी रहती है। छोटी मोटी दुर्घटना यहां आम हो चुकी है।
1977 में विकास प्राधिकरण की पहली परियोजना के रूप में बसी इस कॉलोनी का मुख्य प्रवेश द्वार ही अतिक्रमण से पट गया है। देवास रोड से ऋषि नगर आने-जाने वाले हजारों रहवासियों को रोज जाम, दुर्घटना और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम और प्राधिकरण की अनदेखी से समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
एक नहीं, अनेक बाधाएं-
देवास रोड से ऋषि नगर का मुख्य रास्ता वही है जो कॉलोनी की पहचान है। लेकिन यहां अब 3 बड़ी बाधाएं खड़ी हो गई हैं:
- पेट्रोल पंप की लंबी लाइन:* विकास प्राधिकरण ने विशाला क्षेत्र के निर्माण के समय कॉर्नर पर व्यावसायिक भूखंड आरक्षित किया था। यहां पेट्रोल पंप बन गया। अब यहां सीएनजी वाहनों की लंबी कतारें कालोनी के प्रवेश मार्ग को ही बाधित कर रहे हैं। कालोनी के रहवासियों के लिए पेट्रोल पंप की सुविधा अब दुविधा में परिवर्तित हो रही है। सीएनजी वाहनों की कतार पेट्रोल पंप संचालक प्रवेश मार्ग एवं सर्विस रोड पर ही करवा रहा है इसकी बजाय पेट्रोल पंप के पीछे के हिस्से में पूरी सडक खाली पडी रहती है जिसका उपयोग ही नहीं है।
- ठेले-गुमटियों का कब्जा: पिछले कुछ वर्षों से मुख्य मार्ग पर ही ठेले और अस्थाई गुमटियां लगना शुरू हुईं। अब ये करीब 50 मीटर तक मार्ग पर कालोनी के अंदर की और फैल चुकी हैं। संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इनके आकार में भी रातों रात विस्तार होता है। शुरूआत में ये मार्ग के अंदर फूटपाथ के आकार में थी उसके बाद धीरे-धीरे सुरसा की तरह मुख्य मार्ग की और बढती ही जा रही है।खरीदारी के वाहन: ठेलों से सामान खरीदने आने वाले लोग वाहन सड़क पर ही खड़े कर देते हैं। नतीजतन रास्ता पूरी तरह जाम हो जाता है।
सर्विस रोड पर भी कब्जा
पेट्रोल पंप के सामने देवास रोड से लगा सर्विस रोड भी बना है। नियमों के अनुसार ये आपातकालीन और सुगम आवागमन के लिए है। लेकिन यहां भी स्थाई-अस्थाई अतिक्रमण बना रहता है। ठेले, गाड़ियों की पार्किंग और सामान रखने से सर्विस रोड भी बंद है। मुख्य मार्ग के साथ सर्विस रोड के हाल भी बदतर हो गए हैं। इसके चलते वैकल्पिक मार्ग से रहवासियों को प्रवेश के लिए मजबूर होना पड रहा है।
मजबूरी में वैकल्पिक मार्ग, बढ़ा हादसों का खतरा-
मुख्य मार्ग पर बाधाओं के कारण अब ऋषि नगर के रहवासियों को वैकल्पिक मार्ग और तंग गलियों से प्रवेश करने को मजबूर हैं। तंग रास्तों पर दोपहिया-चारपहिया आमने-सामने, बच्चे-बुजुर्गों को खतरा। इससे समय की बर्बादी भी हो रही है और समस्याओं से दो-चार होने के हाल तो है हीं।
निगम की नजरअंदाजी, समाधान नहीं-
ऋषि नगर 1977 में बसी थी। इसे व्यवस्थित आवासीय कॉलोनी के रूप में विकसित किया गया था। समय के साथ विशाला क्षेत्र एवं मुख्य मार्ग पर ही व्यवसायिक दुकानों का प्रचलन हो गया। ऐसे में मार्ग पर बाधाओं के हाल बन गए। आवासीय स्थिति के भूखंडों पर व्यवसायिक स्थिति की परेशानी यहां लंबे समय से कायम हो चुकी है। इस क्षेत्र से आसपास के कई क्षेत्र जुड़ने से आबादी कई गुना बढ़ी,लेकिन नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने में रुचि नहीं दिखाई है तो विकास प्राधिकरण भी लीज की शर्तों के उल्लंघन के मामलों में खाली हाथ ही है। रहवासियों का कहना है कि मुख्य प्रवेश मार्ग को तुरंत अतिक्रमण मुक्त किया जाए। पेट्रोल पंप के सामने वाहन कतार के लिए अलग व्यवस्था हो। सर्विस रोड से अस्थाई अतिक्रमण पर रोक लगाई जाए। ठेले-गुमटियों को वैकल्पिक वेंडिंग जोन में ले जाया जाए।
विकास प्राधिकरण लगाए व्यवस्थित नक्शा-
शहर की सबसे व्यवस्थित और बडी कालोनी ऋषिनगर में अक्सर आगंतुक पता पूछते रहते हैं। पूर्व में प्रवेश मार्ग पर ही विकास प्राधिकरण ने व्यवस्थित नक्शे का बडा बोर्ड बनाकर लगाया था। समय के साथ यह सड गया और अपने स्थान से गायब हो गया। सिंहस्थ 28 को देखते हुए यहां पूर्ववत कालोनी के नक्शा का बोर्ड बनाकर लगाया जाना आवश्यक बन पडा है। खास बात यह है कि कालोनी सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारियों की शहर में सबसे बडी बस्ती के रूप में है।