उज्जैन। एक तो बगैर सूचना के बिजली कटौती उपर से उपभोक्ताओं को जवाब दिया जा रहा है कि शिकायत सुबह करो या फिर 1912 पर ही बात करो। ये आलम है बिजली कंपनी की नईसडक शाखा के। मनमानी पर उतारू कंपनी के कर्मचारी किसी की सूनने को तैयार नहीं है या यूं कहें कि उन पर किसी का जोर नहीं तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। आम उपभोक्ता के लिए जारी नंबरों को उठाने पर शिकायत के निवारण की बजाय उसे टका सा जवाब मिल रहा है।पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के शहर संभाग अंतर्गत पश्चिम जोन के नईसडक शाखा पर सभी काम मनमानी से हो रहा है । विद्युत कंपनी के नियमों को ताक पर रख दिया गया है। क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बगैर सूचना के ही संधारण के नाम पर कटौती की जा रही है। यहां तक की स्ट्रीट लाईट के फाल्ट को भी तत्काल ठीक करने की बजाय उसे भी दुसरे दिन पर टाला जा रहा है। ऐसी स्थितियों में होने वाली दुर्घटना के लिए जिम्मेदारी लेने को अधिकारी तैयार नहीं हैं।बगैर सूचना के जमकर कटौती-क्षेत्र के वार्ड नंबर 32 में उपभौक्ता इनकी मनमानी से बूरी तरह से परेशान हैं। पार्षद प्रतिनिधि ओमप्रकाश रामी बताते हैं कि बगैर सूचना के लाईट कटौती की मनमानी अब चरम पर पहुंच चुकी है। रात में स्ट्रीट लाईट में बिजली कंपनी के फाल्ट होने से क्षेत्र की स्ट्रीट लाईटें बंद होने पर जोन कार्यालय पर सूचना दिए जाने पर उनका कहना था कि कल सुबह शिकायत दर्ज होगी। इसके साथ ही 1912 पर शिकायत का सुझाव दिया गया। अधिकारियों से बात करने पर वे भी संतुष्टिपूर्वक जवाब न देते हुए मनमानी को प्रश्रय दे रहे हैं। क्षेत्र में छोटी मोटी कटौती की सूचना सोश्यल मिडिया के व्हाट्सप ग्रुप में डालकर उपभोक्ताओं को बेवकूफ बनाया जा रहा है। मनमानी की कटौती घंटों की जा रही है जिसकी कोई सूचना नहीं दी जा रही है। शनिवार को ही बगैर सूचना सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक कटौती की गई। उमस और गर्मी में क्षेत्र के उपभोक्ताओं के बूरे हाल थे। शिकायत करने वालों को जोन से टका सा जवाब दिया कि 1912 पर शिकायत करो। अधिकारियों से बात करने पर भी कोई जवाब नहीं दिया गया। अक्सर 2-3 घंटों के लिए बिजली गायब होना क्षेत्र में आए दिन का काम हो गया है।आसपास के क्षेत्र के भी यही हाल-वार्ड 32 ही नहीं उसके आसपास के क्षेत्र में भी बिजली कंपनी की और से यही स्थिति आम उपभोक्ता बता रहा है। बहादुरगंज ,दूध तलाई,मालीपुरा सहित आसपास के जुडे क्षेत्रों में भी अक्सर 2-3 घंटों की कटौती ऐसे की जा रही है जैसे कंपनी की कोई विधि मत जिम्मेदारी ही नहीं है। छोटी-छोटी बातों के लिए उपभोक्ताओं से राशि लेने वाली कंपनी के अधिकारी आम उपभोक्ता को दुधारू गाय समझकर अपने काम को अंजाम देने की स्थिति में आ गए हैं। शहरी गौपालकों की तरह सिर्फ राजस्व के लिए उपभोक्ता पर दबाव देने वाले कंपनी के अधिकारी उपभोक्ता को सूचना तक देना वाजिब नहीं समझ रहे हैं और मनमानी कर रहे हैं।