नगर निगम ने चौडीकरण करते समय मदद का आश्वासन दिया और अब नियम बता रहे चौडीकरण की जद में आए पट्टेधारी चौतरफा संकट में घिरे -पट्टेधारियों ने सहयोग किया लेकिन बैंक ऋण देने और नगर निगम नक्शा और सहयोग देने को तैयार नहीं

उज्जैन। शहर में चौतरफा जारी चौडीकरण में क्षेत्र के पट्टेधारी चौतरफा संकट से घिर गए हैं। ऐसे में उनके मकानों का सिंहस्थ तक निर्माण होना संशय में दिखाई देने लगा है। चौडीकरण की शुरूआत में अधिकारी पट्टेधारियों को आश्वासन दे रहे थे और चौडीकरण में मकान तोडने के बाद से उनके बोल ही बदल गए हैं।शहर में बारह खोली,जयसिंहपुरा मार्ग के साथ गेल इंडिया –नीलगंगा मार्ग का चौडीकरण अन्य क्षेत्रों के साथ बराबर चल रहा है। इन मार्गों के कई निवासी पट्टाधारी है और बीपीएल श्रेणी से हैं। चौडीकरण की शुरूआत में उन्हें नगर निगम के अधिकारियों ने कहा था कि चौडीकरण में सहयोग के उपरांत उनके नक्शे पास होंगे और उन्हे वैधानिकता मिल सकेगी । ऐसे में उन्हें नगर निगम बैंकों से ऋण में भी सहयोग करेगी,लेकिन अब जब मकान टूट चुके हैं और काम हो चुका है । ऐसे में पट्टेधारी मकान वाले आर्थिक संकट से घिर गए हैं। पट्टेधारी क्षेत्र में 20-50 वर्षों से निवास कर रहे हैं। इनमें से कई के पट्टे पर नामांतरण हो चुका है और वे नियमित संपत्तिकर,पेयजल का पैसा जमा कर रहे हैं।कोई वैधता की स्थिति नहीं-चौडीकरण में मकान टूटने पर कई पट्टेधारियों की आर्थिक स्थिति खराब है। जब वे अपने पट्टे पर लोन के लिए बैंकों में संपर्क कर रहे हैं तो उनके पट्टे की वैधता पर सवाल करते हुए मना किया जा रहा है। इसके साथ ही न तो उनके पट्टे के नक्शे पास हो रहे हैं न ही क्षेत्र का ही नगर तथा ग्राम निवेश विभाग का  ही नक्शा है जिसे लेकर भी सवाल खडा हो रहा है। खास तो यह है कि वैधानिक पटृटे पर नगर निगम भी नक्शा पास करने से बच रही है उसके अधिकारी अन्यानेक दस्तावेज मांग रहे हैं जबकि इन क्षेत्रों में चौडीकरण से पूर्व अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने ऐसे निवासियों को आश्वस्त किया था कि उन्हें हर संभव मदद की जाएगी।मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र के वोटर-खास बात यह है कि ये दोनों ही क्षेत्र मुख्य मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। नगर निगम के सूत्रों के अनुसार दोनों मार्ग पर करीब 100 से अधिक ऐसे पट्टेदार हैं जो दशकों से यहां रह रहे हैं लेकिन उनके नक्शे नहीं होने से उन्हें मकान बनाने के लिए बैंकों से ऋण नहीं मिल पा रहा है। इन क्षेत्रों में कई पटृटेदारों ने तो कुछ वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2.50 लाख रूपए लेकर अपने मकानों का निर्माण भी किया था और हालिया चौडीकरण में इनके मकान जद में आ गए हैं। ऐसे में इन्हें अब प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलना भी मुश्किल हो गया है। कुछ पट्टेदार ऐसे हैं जिनके आवासों पर अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला था और चौडीकरण में उनके पूरे मकान ही हिल गए हैं। जर्जर मकानों में अगर ज्यादा समय तक वे रहे तो किसी भी दिन हादसे की स्थिति बनना तय है।

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