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पिपलिया मंडी। गांव काचरिया चंद्रावत में दिनांक 08/06/2025 को एक महिला ने उसके ससुराल में सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली, जिसपर तहसीलदार ने लाश का नक्शा पंचायतनामा तैयार कर उसके शव को मृतिका के पीहर वालो को सुपुर्द किया। जिसपर पुलिस थाना पिपलियामंडी की मर्ग जांच मल्हारगढ़ एसडीओपी नरेंद्र सोलंकी द्वारा की गई, जांच में मृतिका के पति सीताराम पिता पारस सोलंकी, ससुर पारस पिता राधेश्याम बावरी और दादी सास रामकन्याबाई पति राधेश्याम बावरी निवासी काचरिया चंद्रावत के द्वारा मृतिका को अपने पीहर से बार बार रुपये लाने और दहेज के लिए प्रताड़ित और मारपीट करने के तथ्य प्रकट हुए। जिसपर पुलिस ने मृतिका के पति, ससुर और दादी सास के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया और गिरफ्तार कर न्यायालय मे पेश किया। न्यायालय में पुलिस ने आरोपियो के विरुद्ध कुल 14 गवाह और 37 दस्तावेज पेश किये। आरोपियों की ओर से ये बचाव लेकर तर्क किए गए कि, मृतिका के भाई, भाभी, मामा और बहन के बयानों में कथित दहेज की राशि और उसकी मांग को लेकर गंभीर विरोधाभास व विसंगतियां पाई गईं. तथा घटना के तुरंत बाद हुई मर्ग कार्यवाही और लाश पंचायतनामा के समय मृतिका के परिजनों ने दहेज या प्रताड़ना के संबंध में पुलिस या तहसीलदार को कोई जानकारी नहीं दी थी. घटना के करीब 11 से 20 दिन बाद बयानों में इन आरोपों को सोच-विचार कर जोड़ा गया. और मृतिका की बहन और अन्य साक्ष्यों से यह बात भी सामने आई कि मृतिका को संतान न होने का संताप भी था। बचाव पक्ष की इन तर्कों से सहमत होते हुए जिला सत्र न्यायालय मंदसौर द्वारा आरोपियो को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करने का निर्णय दिया। न्यायालय में बचाव पक्ष की ओर से सफल पैरवी अधिवक्तागण – एम के कुरैशी, फिरोज खान, एम जैनुल मंसूरी, अख्तर खान द्वारा की गई।