खुसूर-फुसूर
त्रि संयोग का टीम वर्क …
महाआयोजन से पूर्व धर्म नगरी में त्रि संयोग के तहत श्रद्धालुओं का ऐसा बहाव आया कि सभी इस श्रद्धा आस्था के आगे नतमस्तक थे। व्यापक प्रबंध भी छोटे लगने लगे थे। श्रद्धालुओं का रैला पुराने शहर में पूरी तरह से छाया रहा। जिधर देखो उधर श्रद्धालु ही श्रद्धालु देखे गए। भगवान के दर्शनों के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमडे थे। चौडा किया गया सवारी मार्ग भी विकास के नजरिए से देखने पर छोटा लग रहा था, तो दर्शनों के लिए लगी लाईन का अटूट क्रम जारी था। घंटों के बाद भी श्रद्धालु अपने भगवान के दर्शन के लिए डटे रहे। यह सब संभव हुआ व्यापक प्रबंध एवं टीम वर्क से । अफसरों ने एक जूटता के साथ काम करते हुए हर परिस्थिति में श्रद्धालुओं को सुलभ दर्शन करवाने की ठानी थी और उसे संभव कर दिखाया। प्रशासन के मुखिया और मंदिर के प्रमुख के साथ वर्दी कप्तान, मंदिर के प्रमुख,ग्रामीण विकास वाले अफसर सब ने मिलकर एक जूटता के साथ श्रद्धालुओं की सेवा में अपना अहम योगदान दिया और लाखों की संख्या में आए श्रद्धालुओं को बगैर कष्ट दर्शनों में अपना सहयोग देकर उन्हें दर्शन करवाया गया। यूं कहें की महाआयोजन पूर्व टीम वर्क का पूर्वाभ्यास किया गया तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। इनके इस टीम वर्क के पूर्वाभ्यास में नगर की संस्था के प्रशासन ने भी अपनी अच्छी सेवाओं के साथ पूरा योगदान दिया और उसके प्रशासनिक युवा कप्तान ने सफाई की ऐसी व्यवस्था की थी की लाखों श्रद्धालुओं के होने के बाद भी गंदगी के हाल कहीं नहीं दिखे। अस्पताल प्रशासन ने इनके साथ कदम ताल करते हुए टीम वर्क में बराबर निर्देशों का पालन किया। खुसूर-फुसूर है कि महाआयोजन के दौरान इसी टीम वर्क की महती आवश्यकता पूरी तरह से होगी। त्रिसंयोग का आयोजन तो महाआयोजन के दौरान होने वाले सभी प्रसंगों से बहुत छोटा रहा है। महाआयोजन में तो श्रद्धा का तुफान उठेगा और उसे नियंत्रित करने के लिए भी त्रि स्तरीय तैयारी करना होगी और उस तैयारी के तहत त्रिस्तरीय टीम वर्क भी करना होगा।