खुसूर-फुसूर
गैंगवार…
धर्मनगरी में आपराधिक तत्वों का बोलबाला धीरे-धीरे बढता जा रहा है। मालवा के ह्दयस्थल की शांत तासीर को आपराधिक तत्व बराबर खून से सरोबार करने के लिए उतावले और निडर दिखाई दे रहे हैं। इन्हें न कानून का खौफ है और न ही वर्दी का भय। पिछले चार दिनों में जिस तरह के विडियो सोश्यल मिडिया पर सामने आए हैं उससे इस बात की पुष्टि हो रही है। दो गोलीकांड में दो युवकों का घायल होना । एक घर में आग लगाना। खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन किया जाना। उसके बाद एक गोली कांड में षडयंत्र उजागर होना। इससे यह तय हो रहा है कि कहीं न कहीं ये सभी आर्थिक स्पर्धा में शामिल हैं और इनके हित प्रभावित हो रहे हैं जिसके कारण इनकी प्रतिस्पर्धा है। वर्दी ने अपने धर्म को निभाते हुए पूरे मामले में मुस्तैदी के साथ काम को अंजाम देते हुए इन आपराधिक तत्वों को इन्हीं के जाल में घेर दिया है । इस पूरे मसले में एक बात और उभरकर सामने आ रही है कि धीरे-धीरे ये अपनी संख्या बढाने के लिए पैंतरों के तहत एक दुसरे की दुश्मनी निकालने के लिए साथ देते हुए उसे अपने साथ ले रहे हैं जिससे की सामान्य विवाद का युवक भी इनमें से एक गैंग की तरफ अपराध में उलझकर इनकी गैंग की संख्या वृद्धि में अपना नाम दे रहा है। खुसूर-फुसूर है कि 4 दशक पूर्व ऐसे ही पैंतरों से देश की आर्थिक राजधानी में भी गैंग वृद्धि की गई। सामान्य मामलों के विवाद में युवकों को धीरे-धीरे आपराधिक मामलों में शामिल किया गया। एक के बाद एक युवक जुडते गए और इनमें से ही कुछ बडे अपराधी देश के लिए ही नासुर बन गए । वहां वर्दी को इसके खात्में के लिए बाद में काफी मशक्कत करना पडी थी। इससे पहले की धर्म नगरी की शांत फिंजा में आपराधी जहर घोले कहानी के अंत के लिए वर्दी को यदा-यदा ही धर्मस्य…का पाठ पढना शुरू कर देना चाहिए।