अब फुल डेप्थ रिक्लेमेशन तकनीक के तहत  नई सड़कें बनाई जाएंगी

उज्जैन। उज्जैन  सहित  प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अब फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक के तहत ही नई सड़कें बनाई जाएंगी।
नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने प्रत्येक नगर निगमों और संभाग स्तर के अधिकारियों को एफडीआर तकनीक से सड़कें बनाने को लक्ष्य दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ठ व किया किया गया है कि इस काम में बहोना नहीं चलेगा कि हम नहीं बना सकते हैं।
ऐसे पुराने मार्ग चिह्नित किए जाएंगे, जहां सड़क ऊंची हैं और मकान नीचे हैं। इन पुरानी सडक़ों को उखाडक़र इससे निकली सामग्री (डामर, कंक्रीट और मिट्टी) को 100 प्रतिशत रिसाइकिल करके नई और मजबूत सड़क बनाई जाएगी।

बता दें कि एफडीआर तकनीकी मैं पुरानी सडक़ को उखाड़कर, उसमें सीमेंट, केमिकल मिलाकर, फिर से बिछाकर कंप्रेस किया जाता है, जिससे लागत 40-50 प्रतिशत कम हो जाती है। यह सड़क निर्माण का एक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल तरीका है।  दरअसल, प्रदेश के शहरों में अधिकांश सड़कें ऐसी हैं जिन पर सड़क के ऊपर सड़क बना दी गई है। एक के बाद एक लेयर डालने से सड़कों की ऊंचाई इतनी बढ़ गई है कि पास के मकान सड़कों से नीचे हो गए हैं। ऐसी दशा में घर के अंदर का पानी बाहर आना, बाहर से ड्रेन आउट करना मुश्किल हो जाता है।

सीजीबीएम तकनीक से भी बनाई जाएंगी सड़कें

सीमेंट ग्राउटेड बिटुमिन मिक्स (सीजीबीएम) तकनीक से भी सड़कें बनाई जाएंगी। यह सड़क निर्माण की एक हाइब्रिड या अर्ध-लचीली तकनीक है, जिसमें लचीले और कठोर दोनों प्रकार के फुटपाथों के गुण होते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से भारी ट्रैफिक, जलभराव वाले क्षेत्रों और ऐसे स्थानों के लिए बहुत उपयोगी है जहां बसों के रुकने (बस स्टॉप) या बार-बार ब्रेक लगाने के कारण सड़कों के उखड़ने का खतरा ज्यादा होता है। प्रदेश में इस तकनीक से भी सड़कें बनाई जाएंगी।

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