अक्षय तृतीया पर श्रीआदिनाथ भगवान का इक्षु रस से अभिषेक

महिदपुर। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर नगर स्थित विश्व के प्राचीन तीर्थों में से एक श्री शत्रुंजय आदिनाथ तीर्थधाम (किला जैन मंदिर) में 2300 वर्ष प्राचीन मूलनायक श्री आदिनाथ भगवान का इक्षु रस (गन्ने के रस) से भव्य अभिषेक किया गया। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अभिषेक का पुण्य लाभ विजयकुमारजी कंवरलालजी जैन परिवार द्वारा लिया गया। प्रथम केसर पूजा एवं पुष्प पूजा का लाभ माणकलालजी अशोकजी नवलखा परिवार को प्राप्त हुआ, वहीं आरती एवं मंगल दीपक का लाभ विमलचंदजी मेहता परिवार द्वारा लिया गया।
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व
जैन धर्म के अनुसार युगादिदेव भगवान श्री आदिनाथ ने दीक्षा के पश्चात 400 दिनों तक निर्जल एवं निराहार तप किया। वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन वे हस्तीनापुर पहुंचे, जहां प्रजा उनके दर्शन हेतु उमड़ पड़ी। उस समय राजकुमार श्रेयांस कुमार को जाति स्मरण ज्ञान हुआ और उन्होंने विधिपूर्वक भगवान को इक्षु रस का आहार कराया। यह क्षण जैन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
तीर्थधाम की विशेषता
श्री शत्रुंजय आदिनाथ तीर्थधाम, महिदपुर में विश्व में सर्वप्रथम 108 श्री आदिनाथ भगवान की प्रतिमाएं विराजित हैं, साथ ही यहां पांच महातीर्थों की रचना भी की गई है, जो इसे विशेष धार्मिक महत्व प्रदान करती है।
इस अवसर पर तीर्थधाम ट्रस्ट द्वारा गन्ने के रस से साधर्मिक भक्ति का आयोजन किया गया। ट्रस्ट के सचिव हेमंत आंचलिया ने सभी लाभार्थी परिवारों की अनुमोदना करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित समाजजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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