योजना की 50 लाख दस्तावेज देने के बाद नि:शुल्क रजिस्ट्री में फंसा विक्रयकर्ता का पेंच:राजस्व विभाग में रार

 

उज्जैन/भोपाल। सरकार की स्वामित्व योजना में प्रदेश में 50 लाख नि:शुल्क रजिस्ट्री में विक्रयकर्ता का पेंच बराबर फंसा हुआ है। सरकार की योजना के प्रहार से राजस्व विभाग में रार की स्थिति निर्मित हो गई है। तहसीलदार संघ भी इस मामले में अपने आप को अलग कर चुका है। इसके विपरित सरकार की योजना को अमल में लाने के लिए प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टरों ने पटवारियों को नौकरी से बेदखल कर दिया है। राजस्व विभाग में इस मामले में दिन बीतने के साथ रार बढती जा रही है।

 

प्रदेश के 50 लाख आवासीय भूखंडों की निःशुल्क रजिस्ट्री को लेकर शासन-पटवारियों में विवाद गहरा गया है। अभियान के 17 दिन बाद भी पटवारी रजिस्ट्री में विक्रेता बनने को तैयार नहीं है। योजना के अमल के लिए कलेक्टरों फ्री हैंड मिलने की स्थिति में अब कार्रवाई का दौर शुरू हो चुका है। इसके चलते जिलों में कलेक्टर राजस्व अमले की नींव पर ही वार करने पर आमादा हो गए हैं। क्षेत्रीय स्तर पर रतलाम,देवास में कई पटवारियों को नौकरी से बेदखल कर दिया गया है। उज्जैन में करीब दो दर्जन को नोटिस दिया गया है। इधर पटवारी संघ ने भी इस कार्रवाई के विरोध में सामान्य कामकाज बंद कर कलेक्टरों को निशाने पर लेकर आंदोलन शुरू कर दिए हैं।

पटवारी राजस्व की नींव-राजस्व विभाग का मूल धरातल पर कोटवार,पटवारी से शुरू होता है। इसके उपर राजस्व निरीक्षक,नायब तहसीलदार,तहसीलदार,अनुविभागीय अधिकारी एवं कलेक्टर होता है। यूं कहा जाए की एक जिला राजस्व विभाग का एक घर है तो उसका मुखिया कलेक्टर है। ऐसे में स्वामित्व की योजना को लेकर घर में ही फूट के हाल कायम हो गए हैं।

दस्तावेज दिए फिर रजिस्ट्री अनिवार्य क्यों-इधर सामने आ रहा है कि बैंकों में कर्ज के लिए आवासीय स्थिति में संबंधित भूखंड की रजिस्ट्री होना आवश्यक नहीं है। जानकारो के अनुसार इसके लिए जमीन से संबंधित दस्तावेज पर्याप्त होते हैं, जो स्वामित्व योजना में दिए जा चुके है। कोई बैंक इन दस्तावेजों पर कर्ज नहीं देता तो शासन को बैंकों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए थे। न कि रजिस्ट्री के लिए इस प्रक्रिया में पटवारियों को उक्त भूखंडों का विक्रेता बनाया गया, क्योंकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया क्रेता व विक्रेता के बीच संपन्न होती है।

 

ये उठ रहे सवाल-

निःशुल्क रजिस्ट्री शुरू करने से पहले राजस्व विभाग ने आगर मालवा, हरवा, बड़वानी, अशोकनगर और रायसेन में पायलट प्रोजेक्ट चलाया था। इसी दौरान पटवारियों की आपत्तियां सामने आ गई थीं।

संबंधित हितग्राही के नाम पर भूखंड के जमीनी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए थे तो रजिस्ट्री की जरूरत क्यों थी?

लोन लेने के लिए कोई बैंक रजिस्ट्री की प्रति मांग रहे थे या लोन देने से इंकार कर रहे थे तो शासन से सार्वजनिक आदेश जारी क्यों नहीं कराया गया?

तहसीलदार संघ स्वामित्व योजन से विरत हुआ-

इस पूरे मामले में तहसीलदार संघ ने मंगलवार को प्रमुख सचिव राजस्व को एक ज्ञापन सौंपकर अपने आप को स्वामित्व योजना से विरत कर लिया है। उन्हें रजिस्ट्री करने के लिए अधिकार दिए गए थे। ऐसे में संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तहसीलदार नवीन चंद्र कुंभकार के अनुसार ज्ञापन सौंपकर संघ सदस्यों ने अपने आप को रजिस्ट्री के कार्यों से विरत कर लिया है।

 

देवास में 3 पटवारी बेदखल-स्वामित्व योजना में शून्य प्रगति और अनुशासनहीनता पर एक्शन लेते हुए कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने 3 परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की हैं। शासकीय कार्य में लापरवाही और आदेशों की अवहेलना पर पटवारी नितिन विश्वकर्मा, अजय नागर और विशाल टईया को सेवा से पृथक किया गया है। कलेक्टर द्वारा सोनकच्छ तहसील के हल्का घिचलाय में पदस्थ पटवारी नितिन विश्वकर्मा, देवास ग्रामीण तहसील के हल्का क्रमांक 103 में पदस्थ पटवारी अजय नागर तथा तहसील टोंकखुर्द में पदस्थ पटवारी विशाल टईया को एक माह का अग्रिम वेतन देकर सेवा से पृथक करने संबंधी आदेश जारी किए गए हैं।संबंधित पटवारियों को फरवरी 2024 में तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर पटवारी पद पर पदस्थ किया गया था।

 

रतलाम में 4 बेदखल-स्वामित्व योजना की प्रगति एवं परिवीक्षा अवधि के समग्र कार्य निष्पादन के मूल्यांकन के आधार पर रतलाम ग्रामीण में 4 पटवारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। कलेक्टर एवं नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी अजय कटेसरिया ने रतलाम ग्रामीण तहसील में पदस्थ चार परिवीक्षाधीन पटवारियों अंकित गुप्ता, शैलेन्द्र प्रताप राठौड़, सौरभ पुरोहित एवं यशवर्धन शर्मा की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं। यह निर्णय परिवीक्षा अवधि के दौरान उनके कार्य निष्पादन, निर्धारित दायित्वों के निर्वहन तथा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुपालन के समग्र मूल्यांकन के आधार पर लिया गया है।

उज्जैन में 21 को नोटिस-स्वामित्व योजना की प्रगति एवं परिवीक्षा अवधि के समग्र कार्य निष्पादन के मूल्यांकन के आधार पर उज्जैन जिले के तराना एवं माकडौन तहसील अंतर्गत 21 परीविक्षाधीन पटवारियों को नोटिस दिए गए हैं। तहसीलदार अनिरूद्ध्‍ मिश्रा ने पटवारियों को नोटिस देकर जवाब मांगे थे। इन पर कार्रवाई की स्थितियां अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।

 

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