कान्ह के प्रदुषण से शिप्रा की मुक्ति के लिए सैंकडों अरब की योजना पर अमल देवास में डेढ करोड के स्टाप डेम की स्वीकृति की अपेक्षा में शिप्रा में प्रदुषण -स्थानीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से चर्चाकर पूरे मामले से अवगत करवाया

उज्जैन। शिप्रा में प्रदुषण को लेकर स्थानीय अखाडा परिषद ने मुहिम छेडी है। देवास में नागदहन नदी का प्रदुषित पानी शिप्रा में मिलाने को लेकर संतों ने गुस्सा जताया है। मात्र डेढ करोड के स्टाप डेम की स्वीकृति की अपेक्षा में यह प्रदुषित पानी शिप्रा में बहाया जा रहा है। स्थानीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष महंत डा. रामेश्वर दास ने इसे लेकर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव से चर्चा करने की जानकारी दी है। उनके अनुसार देवास में शिप्रा निरीक्षण में सामने आई बातों से मुख्यमंत्री को अवगत करवाया है अगले कुछ दिनों में डेम की राशि स्वीकृत हो जाएगी।

स्थानीय अखाडा परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने उज्जैन से देवास पहुंचकर शिप्रा में प्रदुषण की स्थिति को देखा है। नदी नाले के साथ फैक्ट्री का निरीक्षण कर शिप्रा नदी में मिल रहे जहरीले पानी को लेकर देवास कलेक्टर को भी उन्होंने चेतावनी दी है।

कान्ह के लिए क्लोज डक्ट प्रोजेक्ट-

शिप्रा की सेहत सुधारने के लिए सरकार ने कान्ह नदी क्लोज डक्ट योजना को अमल में लाया है।918 करोड से अधिक की योजना में इंदौर से कान्ह नदी में आ रहे प्रदुषण को रोका जाएगा। इसके साथ ही शिप्रा को प्रवाहमान बनाने के लिए सेवरखेडी –सिलारखेडी योजना को अमल में लाया गया है। इसके विपरित देवास से शिप्रा में मिल रहे प्रदुषित पानी को लेकर प्रशासनिक नजरअंदाजी की स्थिति कायम होने को लेकर संतों ने यह निरीक्षण किया है। स्थानीय अखाडा परिषद अध्यक्ष महंत डा. रामेश्वर दास के अनुसार कान्ह का प्रदुषण रोकने की स्थिति में देवास से शिप्रा नदी में केमिकल उद्योगों का जहरीला पानी सरे आम मिलाया जा रहा है। जिसे लेकर फिलहाल कोई कार्य योजना नहीं है। ऐसे में कान्ह की योजना कैसे सार्थक होगी। 2028 के उज्जैन सिंहस्थ कुंभ में तो स्नान होना ही है। इससे पहले शिप्रा में पर्व स्नानों की परंपरा है। प्रदुषण से श्रद्धालु बराबर आहत हो रहे हैं। इसी प्रदूषण को लेकर संत समाज ने निरीक्षण किया। निरीक्षण में महंत रामेश्वर गिरी महाराज, महंत महावीरनाथ महाराज साथ थे। देवास के नागदा से निकली नागदहन नदी आगे चलकर शिप्रा में मिलती है। इसी में की फैक्ट्रियों का बगैर उपचारित पानी , जहरीला केमिकल युक्त पानी रात के अंधेरे में नदी में छोड़ा जा रहा है। यह पानी इतना प्रदूषित है कि इससे न सिर्फ नदी, बल्कि खेत और पशु भी प्रभावित हो रहे हैं। संतों के अनुसार शिप्रा में लाखों श्रद्धालु आचमन करते हैं और सिंहस्थ में अब सिर्फ दो साल का समय बचा है। उन्होंने सवाल उठाया कि नागदहन नदी को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे।

डेढ करोड के स्टाप डेम के फेर में प्रदुषण-

डा. रामेश्वर दास ने बताया कि देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह से मुलाकात कर प्रोजेक्ट की जानकारी ली और चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो संत समाज मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। कलेक्टर ने भरोसा दिलाया कि सिंहस्थ से पहले यहां स्टापडेम बनाकर पानी रोका जाएगा। शिप्रा को स्वच्छ बनाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की योजना पर काम चल रहा है। यहां से उपचारित पानी कृषि के लिए दिया जाएगा। प्रदूषित पानी को एसटीपी प्लांट तक पहुंचाया जाएगा, जबकि अमृत फेज-2 के तहत सीवेज लाइन का काम भी अगले साल जून-जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य है। महंत डा. रामेश्वर दास ने कहा कि उन्होंने प्रतिनिधि मंडल के साथ एक उद्योग का निरीक्षण किया है जहां उन्हें संतुष्टिकारक जवाब नहीं मिला और न ही कारगर कार्रवाई की स्थिति ही मिली है।

 

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