2250 एमसीएफटी की क्षमता वाले इस बांध में फिलहाल महज 715 एमसीएफटी पानी

उज्जैन। मानसून की अधिकारिक विदाई बुधवार को हो जाएगी। 30 सितंबर के बाद होने वाली किसी भी वर्षा को मौसम विभाग मानसूनोत्तर वर्षा (आफ्टर रैनी सीजन) की श्रेणी में दर्ज करेगा। लेकिन इस बार मानसून की विदाई शहर के लिए राहत नहीं, बल्कि एक भीषण जल संकट का अलार्म बजाकर जा रही है। सात लाख की आबादी की प्यास बुझाने वाले गंभीर बांध में इस समय जल संकट का सन्नाटा पसरा है।2250 एमसीएफटी की क्षमता वाले इस बांध में फिलहाल महज 715 एमसीएफटी पानी ही बचा है- यानी बांध 68 प्रतिशत खाली है। ऊपर से वाष्पीकरण और रोजमर्रा की सप्लाई के चलते बांध से हर दिन 7 से 8 एमसीएफटी पानी तेजी से घट रहा है।

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