सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में डिजिटल और ई-लर्निंग आधारित आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास अब ऐतिहासिक उपलब्धियों में बदलने लगे

उज्जैन/ सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में डिजिटल और ई-लर्निंग आधारित आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास अब ऐतिहासिक उपलब्धियों में बदलने लगे हैं। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज के सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि आज विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रमों में अग्रणी होने का गौरव प्राप्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।कुलगुरु प्रो. भारद्वाज की नई शिक्षा नीति (NEP 2020) पर कार्य करने की नीतियों के चलते विभिन्न अध्ययनशालाओं के विद्यार्थियों में ‘मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स’ (MOOCs) और ‘स्वयम्’ (SWAYAM-NPTEL) पाठ्यक्रमों के प्रति उत्साह लगातार बढ़ रहा है। अब छात्र न्यूनतम क्रेडिट के बजाय अधिकाधिक क्रेडिट अर्जित करने की होड़ में हैं, जिससे परिसर में ऑनलाइन और कौशल-आधारित शिक्षा का एक नया दौर शुरू हो गया है।विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किए गए नवीन पाठ्यक्रमों और आधुनिक नीतियों के कारण इस वर्ष प्रवेश पंजीयन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे जहां एक ओर विद्यार्थियों का “अकादमिक पलायन” पूरी तरह से रुक गया है, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय का सकल नामांकन अनुपात (GER) भी राष्ट्रीय औसत से अधिक हो गया है। इस पंजीयन के तुलनात्मक आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि,गत वर्ष कुल पंजीयन 429 था वहीं वर्तमान सत्र में आज दिनांक तक कुल पंजीयन 987 है।कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इन पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई नई नीतियां शिक्षण पद्धति को अभूतपूर्व मजबूती दे रही हैं। इसी क्रम में, विश्वविद्यालय के प्रमुख कार्यक्रम “दिशा” (DISHA) के अंतर्गत इस अभियान को विशेष रूप से संचालित किया जा रहा है।डॉ. शर्मा ने बताया कि शैक्षणिक सत्र जनवरी-अप्रैल 2026 में विश्वविद्यालय के लगभग 4000 विद्यार्थियों ने इन पाठ्यक्रमों में अपना नामांकन करवाया, जिनमें से करीब 530 विद्यार्थियों ने परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था। ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ (NTA) द्वारा आयोजित की गई इस ऑनलाइन परीक्षा के परिणामों में विश्वविद्यालय के 248 छात्र-छात्राओं ने अभूतपूर्व सफलता हासिल कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है।उत्कृष्ट प्रदर्शन की इस श्रृंखला में विश्वविद्यालय के 15 विद्यार्थियों ने “एलीट + गोल्ड” (Elite + Gold) तथा 55 विद्यार्थियों ने “एलीट + सिल्वर” (Elite + Silver) प्रमाणपत्र हासिल कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।डॉ. शर्मा ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि सफल विद्यार्थियों को मूक्स परीक्षा का शुल्क भी रिफंड करने का निर्णय कार्य परिषद द्वारा लिया गया है, जिसके अंतर्गत यह कार्रवाई प्रचलित कर दी गई है।इस फ्लैगशिप कार्यक्रम के क्रियान्वयन में विश्वविद्यालय की एनपीटीईएल कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मेघा पाण्डेय का कहना है कि इन पाठ्यक्रमों में सतत समन्वय से विद्यार्थियों के बीच जागरूकता और सहभागिता का दायरा तेजी से बढ़ा है। इन संयुक्त और निरंतर प्रयासों के बदौलत वर्तमान में विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं में कुल 21 लोकल चैप्टर्स सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जो विद्यार्थियों को सीधे राष्ट्रीय स्तर की उच्च गुणवत्ता वाली ऑनलाइन शिक्षा से जोड़ रहे हैं।इस उपलब्धि कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मूक्स (MOOCs) और “स्वयम्” जैसे ऑनलाइन पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल विकास और रोजगार क्षमता को सशक्त बनाने में रीढ़ की हड्डी साबित हो रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि अधिक से अधिक छात्र डिजिटल शिक्षा के माध्यम से स्वयं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप ढालें।सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन की कार्यपरिषद सदस्य डॉ. राजेश सिंह कुशवाह ने भी छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि “दिशा” कार्यक्रम विद्यार्थियों को डिजिटल और नवाचार आधारित शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल साबित हुआ हैं।उल्लेखनीय है कि अभी ‘नॉन-एनपीटीईएल मूक्स कोर्सेस’ के परीक्षा परिणाम आने शेष हैं, जिससे सफल छात्रों की संख्या में और अधिक इजाफा होने की पूरी उम्मीद है। विश्वविद्यालय प्रशासन का आगामी लक्ष्य ‘नवाचार आधारित शिक्षा प्रणाली’ और ई-लर्निंग को नई दिशा देते हुए अगले सत्रों में और भी बड़े पैमाने पर विद्यार्थियों को इस डिजिटल मंच से जोड़ना है।

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