श्री महाकालेश्वर मंदिर से माता उमा की सवारी निकली। शाम 4 बजे मंदिर के सभामंडप में विधि-विधान से पूजन के बाद पालकी रवाना हुई।

 

उज्जैन में सोमवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर से माता उमा की सवारी निकली। शाम 4 बजे मंदिर के सभामंडप में विधि-विधान से पूजन के बाद पालकी रवाना हुई।सवारी शिप्रा तट से होकर वापस महाकाल पहुंचेगी। रामघाट पर जवारे और संजा का विसर्जन कर पूजन किया जाएगा।मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों ने सबसे पहले मां उमा की चांदी की प्रतिमा का पूजन-अर्चन किया। इसके बाद प्रतिमा को रजत पालकी में विराजमान किया गया। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल ने माता को सलामी दी।इन मार्गों से निकली सवारीसवारी में डोल रथ पर पीतल की प्रतिमा में गरुड़ पर विराजमान माताजी और भगवान महेश भी शामिल थे। घुड़सवार, पुलिस बल और महाकाल मंदिर समिति का बैंड सवारी की अगुवाई कर रहे थे।सवारी महाकाल चौराहा, महाकाल घाटी और तोपखाना होते हुए आगे बढ़ी। इसके बाद दौलतगंज चौराहा, नई सड़क, कंठाल, सराफा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर और पटनी बाजार से होते हुए शिप्रा तट पहुंची।6 से 12 अक्टूबर तक मनाया उमा-सांझी महोत्सवश्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से श्राद्ध पक्ष में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला उमा-सांझी महोत्सव 6 से 12 अक्टूबर तक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सात दिवसीय महोत्सव में मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों ने विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान किए।इस दौरान प्राचीन सांझी की शिला पर प्रतिदिन आकर्षक रंगोली सजाई गई। भगवान श्री महाकालेश्वर के विभिन्न स्वरूपों के मुखौटों से झांकियां भी सजाई गईं।रामघाट पर जवारे और संजा का विसर्जन कर पूजन के बाद सवारी कहारवाड़ी और बक्षी बाजार होते हुए महाकाल रोड से वापस मंदिर लौटेगी।

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