उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति श्रद्धालुओं को नि:शुल्क प्रसाद की पुरानी व्यवस्था को नए कलेवर में सजा कर एक बार फिर से लाई है। पूर्व में निषेध मार्ग पर तिलक एवं चिरोंजी प्रसाद वितरण की व्यवस्था थी। अब शुक्रवार से दोनों निकासी मार्ग पर श्रद्धालुओं को चना,चिरोंजी और रेवडी का सूखा प्रसाद वितरित किया जाना तय किया गया है।बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रबंध समिति एक बार फिर से पुरानी व्यवस्था नि:शुल्क प्रसाद वितरण पर लौट रही है। श्री महाकालेश्वर मंदिर में पूर्ववत अब दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को प्रतिदिन नि:शुल्क प्रसाद उपलब्ध कराया जाएगा। मंदिर समिति के अनुसार, यह व्यवस्था शुक्रवार से पून:शुरू होगी। पूर्व में यह व्यवस्था 2022 तक मंदिर में रही है। तत्कालीन प्रशासक गणेश धाकड के समय इसे विस्तारित कर ओंकारेश्वर के सामने बड के पेड के नीचे प्रसाद,तिलक एवं कलावा बांधने की व्यवस्था को अंजाम दिया गया था।दो निकास द्वारों पर रहेगी व्यवस्था-दर्शन के बाद मंदिर से बाहर निकलने वाले श्रद्धालुओं के लिए दो प्रमुख निकास द्वारों पर प्रसाद वितरण केंद्र बनाए जाएंगे। यहां पैकेट के रूप में सूखा प्रसाद दिया जाएगा। पूर्व व्यवस्था में खुले रूप से चिरोंजी एवं मूंगफली के दाने का प्रसाद देते हुए तिलक लगाया जाता था अब नई व्यवस्था में पैकेट में प्रसाद दिया जाएगा , अब भी श्रद्धालुओं को तिलक के लिए बाहर घुमने वालों के भरोसे रहना होगा। प्रसाद के पैकेट में चने, चिरौंजी और रेवड़ी शामिल होंगे। पैकेट में प्रसाद दिए जाने से श्रद्धालु इसे आसानी से अपने साथ ले जा सकेंगे।भगवान को भोग के बाद श्रद्धालुओं को वितरण-मंदिर समिति के मुताबिक, प्रतिदिन सुबह पूजा-अर्चना और भगवान महाकालेश्वर को नैवेद्य एवं भोग अर्पित करने के बाद प्रसाद वितरण की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद दर्शन कर बाहर आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद उपलब्ध कराया जाएगा।