इंदौर। महापौर के नाम में मित्र शब्द लेकिन शहर की समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने उन्हें मित्रासुर के कटघरे में खड़ा कर दिया। रीगल तिराहे पर आज कांग्रेस ने महापौर के खिलाफ मित्रासुर का पुतला दहन कर विरोध जताया। नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में पानी की समस्या, बदहाल सड़कें, यातायात अव्यवस्था, कथित भ्रष्टाचार और नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए।कांग्रेस ने मित्रासुर के प्रतीक के जरिए महापौर की कार्यशैली पर राजनीतिक निशाना साधा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जनता ने शहर के विकास और बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद के साथ जनप्रतिनिधियों को चुना है, लेकिन कई समस्याओं को लेकर लोगों को अब भी राहत का इंतजार है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि महापौर जनता के मित्र हैं, तो फिर शहरवासियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान क्यों होना पड़ रहा है?
*नाम पर कटाक्ष काम पर सवाल*-प्रदर्शन का राजनीतिक संदेश साफ था—महापौर की पहचान केवल मित्र नाम से नहीं बल्कि शहर के लिए किए गए कामों से तय होनी चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नगर निगम से जुड़े अनेक मुद्दों पर जवाबदेही की जरूरत है। पानी, सड़क और यातायात जैसी समस्याओं को सामने रखकर पार्टी ने महापौर को घेरने की कोशिश की।
*विरोध के जरिए सियासी संदेश*-रीगल तिराहे पर पुतला दहन केवल नगर निगम की समस्याओं को लेकर विरोध नहीं, बल्कि महापौर की कार्यशैली पर सीधा राजनीतिक हमला भी रहा। मित्रासुर नाम देकर कांग्रेस ने अपने विरोध को प्रतीकात्मक रूप दिया और जनता से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने का प्रयास किया।अब देखना होगा कि कांग्रेस के इन आरोपों पर महापौर और नगर निगम की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है तथा उठाए गए मुद्दों पर समाधान की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।