खुसूर-फुसूर
थ्योरी के अंक आधार पर हों प्रेक्टिकल अंक
हाल ही में बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम आए हैं। इसमें केंद्रीय परीक्षा में जिस विद्यार्थी को थ्योरी में 80 में से 17 अंक मिले हैं उसी विषय की प्रायोगिक परीक्षा में उसे 20 में से 20 अंक दिए गए हैं।यही नहीं जिन विद्यार्थियों को थ्योरी में 80 में से 50-60 अंक आए हैं उनमें से कई को प्रायोगिक परीक्षा के अंक मात्र 12-17 ही मिले हैं। खास यह है कि थ्योरी की परीक्षा की कापियों की चेकिंग बाहरी जिलों में होती है। प्रायोगिक परीक्षा विद्यार्थी के स्कूल में ही होती है। इसके लिए सिर्फ एक एक्सटर्नल रूपी बाह्य शिक्षक आता है। वही विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा लेता है एवं मौखिक परीक्षा जिसे वाय-वाय कहा जाता है उसी समय ली जाती है। जिस विषय की थ्योरी में विद्यार्थी को न्यूनतम अंक प्राप्त हो रहे हैं उसी विषय की प्रायोगिक स्थिति में पूर्ण अंक प्राप्त करने पर सवाल खडे होना लाजिमी है। ऐसा कई विद्यालयों में सामने आया है। इसे लेकर बराबर विद्यार्थी सवाल उठा रहे हैं और उनके सवालों का जवाब परिणाम आने के इतने दिनों बाद भी सामने नहीं आ रहा है। ऐसे में विद्यार्थी इस मामले में संबंधित स्कूल के प्रायोगिक परीक्षा में एक्सटर्नल के साथ संलग्न शिक्षक एवं प्रबंधन के भेदभाव के विचार की स्थिति में हैं। खुसूर-फुसूर है कि जिन विद्यार्थियों की थ्योरी ही स्पष्ट नहीं है उनका प्रेक्टिकल कैसे स्पष्ट हो सकता है और पूर्ण अंक की पात्रता कैसे मिल सकती है। ऐसे में केंद्रीय बोर्ड को बोर्ड परीक्षा में इस पूरे मुद्दे का निदान करते हुए थ्योरी की परीक्षा के प्राप्त अंकों के प्रतिशत के आधार पर प्रायोगिक परीक्षा के कुल अंकों में से उतने ही प्रतिशत अंक की पात्रता दे देना चाहिए जिससे की इस पूरे मामले का अंत ही हो जाए।इसमें एक्सटर्नल की वर्तमान व्यवस्था को लागू रखते हुए विद्यार्थियों की प्रायोगिक कापी को भी थ्योरी की कापी के साथ संलग्न करते हुए चेकर के पास भेजा जाना चाहिए। एक्सटर्नल को मात्र परीक्षा लेने का अधिकार ही रखा जाना चाहिए। अंकों की स्थिति थ्योरी की कापी चेक करने वाले चेकर को ही दी जाना चाहिए।