उज्जैन। नागदा अनुभाग में दस्तक सह स्टॉप डायरिया अभियान के दौरान एसडीएम नागदा रंजना पाटीदार ने कुपोषण उन्मूलन के लिए एक दूरदर्शी पहल “पोषण मित्र मिशन” की योजना तैयार की है। यह पहल प्रशासन, स्वास्थ्य तंत्र और समाज की साझेदारी से बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने की दिशा में एक सशक्त मॉडल के रूप में विकसित की जा रही है।
ग्राम अलसी में सघन फील्ड विजिट के दौरान एसडीएम ने घर-घर पहुंचकर बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया, परिजनों से संवाद स्थापित किया तथा डायरिया से बचाव हेतु ओआरएस एवं जिंक के उपयोग की जानकारी दी। सुश्री पाटीदार बताती हैं कि अभी हमने योजना बद्ध किया है। इस पर हम काम करना चाहते हैं।
“पोषण मित्र मिशन” की प्रस्तावित रूपरेखा-
सुश्री पाटीदार के अनुसार इस योजना के अंतर्गत जनप्रतिनिधियों, शासकीय अधिकारियों, अधिवक्ताओं, व्यापारी संगठनों, क्लब एवं एनजीओ को “पोषण मित्र” के रूप में जोड़ा जाएगा। प्रत्येक कुपोषित बच्चे के लिए 6 माह की अवधि हेतु एक पोषण मित्र निर्धारित किया जाएगा, जो बच्चे के पोषण, स्वास्थ्य और समग्र विकास की जिम्मेदारी निभाएगा।
3M मॉडल: पोषण मित्र की स्पष्ट जिम्मेदारियां
इस मिशन का क्रियान्वयन 3M (Monitoring, Material, Motivation) मॉडल पर आधारित रहेगा, जो सीधे तौर पर पोषण मित्र की जिम्मेदारी होगी—
Monitoring (निरंतर निगरानी)- पोषण मित्र द्वारा आवंटित बच्चे की नियमित प्रगति पर नजर रखी जाएगी। आंगनवाड़ी, आशा एवं एएनएम द्वारा साप्ताहिक हाइट, वजन एवं ग्रोथ माप कर रिपोर्ट साझा की जाएगी। बच्चे की पोषण स्थिति में हो रहे बदलाव का ट्रैक रखा जाएगा। आवश्यकता होने पर स्वास्थ्य संस्थानों से समन्वय कर उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।
Material (पोषण एवं संसाधन उपलब्धता)- बच्चे की जरूरत अनुसार संतुलित एवं पोष्टिक आहार की नियमित व्यवस्था कराई जाएगी। वजन बढ़ाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता सुधारने एवं समग्र विकास हेतु सप्लीमेंट/पोषण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इस हेतु लगभग ₹600–800 प्रतिमाह का व्यय अनुमानित है। आवश्यकतानुसार कपड़े, खिलौने एवं स्वच्छता सामग्री की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे बच्चे का समग्र विकास सुनिश्चित हो।
Motivation (प्रेरणा एवं व्यवहार परिवर्तन)-पोषण मित्र द्वारा बच्चे के माता-पिता को टीकाकरण, नियमित जांच एवं पोषण संबंधी आदतों के लिए प्रेरित किया जाएगा। परिवार को सरकारी योजनाओं (जैसे आयुष्मान कार्ड, संबल, लाड़ली बहना आदि) से जोड़ने में सहयोग किया जाएगा। स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल एवं संतुलित आहार के प्रति जागरूकता बढ़ाकर व्यवहार परिवर्तन सुनिश्चित किया जाएगा।
लक्ष्य आधारित परिणाम
3 माह में: 70% बच्चे SAM से MAM श्रेणी में आएं
6 माह में: 90%+ बच्चे सामान्य (Normal) श्रेणी में आएं
Zero Relapse: बच्चे दोबारा कुपोषित न हों
समन्वित क्रियान्वयन
इस योजना को जनभागीदारी ,प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग,महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD), के समन्वय से क्रियान्वित किया जाएगा, जिससे जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम प्राप्त हो सकें।
योजना जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण-
एसडीएम नागदा द्वारा प्रस्तावित “पोषण मित्र मिशन” प्रशासनिक नवाचार, उत्तरदायित्व और जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। स्पष्ट लक्ष्य, जिम्मेदारी आधारित मॉडल एवं सामुदायिक सहयोग के साथ यह पहल कुपोषण उन्मूलन के क्षेत्र में राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी एवं अनुकरणीय मॉडल बन सकती है।