एनवीडीए की पाईप लाईन के 5 नोजल से त्रिवेणी बैराज में आवक नर्मदा के जल में होगा अमावस्या पर स्नान

 उज्जैन। सर्वपितृ मोक्ष एवं शनिश्चरी अमावस्या के संयोग के चलते 10 अक्टूबर शनिवार को इंदौर रोड त्रिवेणी पर श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचेंगे। इस बार बारिश सामान्य से आधी होने के कारण मानसून के बावजूद मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में पानी नहीं है। अमावस्या स्नान के लिए श्रद्धालुओं के बडी संख्या में आने को देखते हुए नर्मदा से डेढ मिलियन क्यूबिक मीटर पानी लिया जा रहा है। पानी की आवक शुरू हो चुकी है। स्नान के बाद इस पानी के अन्य उपयोग को लेकर संशय की स्थिति सामने आ रही है।10 अक्टूबर शनिवार को अमावस्या पर तीन योगों का संयोग रहने वाला है। शनिश्चरी अमावस्या पर वैसे भी त्रिवेणी स्नान का महत्व और स्नान की परंपरा रही है। ऐसे में इस बार विशेष संयोग में स्नान के लिए प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए प्रारंभिक स्तर पर त्रिवेणी बैराज में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। स्नान के लिए नर्मदा का डेढ एमसीएम पानी लिया जा रहा है।

पाईप लाईन की 5 नोजल से आ रहा पानी-नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने उज्जैन के त्रिवेणी स्थित मोक्ष धाम के पास तक नर्मदा की पाईप लाईन डाली हुई है। यहां लाईन में 5 नोजल 300 मिलीमीटर के लगे हुए हैं। स्नान के लिए पीएचई नगर निगम एवं प्रशासन की पहल पर एनवीडीए ने मंगलवार अपरांह् से पानी भेजने की शुरूआत कर दी है। इन नोजलों से बराबर पानी आ रहा है जो सीधे त्रिवेणी बैराज में एकत्रित हो रहा है। इसी बैराज में एकत्रित पानी से श्रद्धालुओं के शनिश्चरी अमावस्या पर विशेष संयोग अंतर्गत स्नान करवाया जाना है। अधिकारिक स्तर पर इसकी पुष्टि की जा रही है।

नहीं मिल रहा कान्ह का पानी –अगर सूत्रों की माने तो बताया जा रहा है कि अभी कान्ह का पानी वर्तमान में शिप्रा के त्रिवेणी बैराज में नहीं मिल रहा है। अस्थाई मिट्टी के डेम से पानी अपने दायरे में ही है और उसे पिपल्या राघौ डायवर्शन लाईन में ही छोडा जा रहा है। इस पानी को क्षेत्र के किसान भी उपयोग में ले रहे हैं। इसके चलते कान्ह के पानी की आवक त्रिेवेणी बैराज में रूकी हुई हैं।

स्नान के बाद पानी उपयोग पर संशय-

इधर बताया जा रहा है कि स्नान के लिए नर्मदा के छोडे जा रहे डेढ एमसीएम पानी का बाद में उपयोग पर संशय है। उसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि इस मानसून के दौरान नदी में तेज बहाव का अभाव रहा है। इस बीच कान्ह का जहरीला पानी भी नदी में पिछले समय का विभिन्न बैराजों तक पहुंचा है और जिससे शिप्रा के त्रिवेणी,गऊघाट सहित अन्य आगे के बैराज में पुरानी गंदगी बराबर जमी हुई है। इसके चलते अगर स्नान के बाद यह पानी आगे छोडा जाता है तो बैराज की गंदगी युक्त हो जाएगा।ऐसे में इसके अगले उपयोग को लेकर संशय की स्थिति पीएचई विभाग से जुडे अधिकारी बता रहे हैं।

आदेश हुए नए ईई 4 दिन बाद भी नहीं पहुंचे-

मध्यप्रदेश शासन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने 3 अक्टूबर को एक आदेश जारी कर 77 प्रभारी कार्यपालन यंत्रियों के तबादले किए हैं। इसी में सहायक यंत्री लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी उपखंड खरगौन एवं  कार्यपालन यंत्री खरगौन का अतिरिक्त प्रभार देख रहे है राहुल सुर्यवंशी को कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी  संधारण खंड नगर निगम उज्जैन बनाकर भेजा गया है। वर्तमान में इस पद का प्रभार सहायक यंत्री शिवम दूबे के पास है। बुधवार तक नए कार्यपालन यंत्री ने यहां पहुंचकर पद भार ग्रहण नहीं किया है।

जल निगम की लाईन से प्रेशर रिलीज-

बुधवार को बडनगर रोड खडोतिया में जल निगम की करीब एक मीटर व्यास की पाईप लाईन से दबाव कम करने के लिए पानी छोडा गया। यहां पर जल निगम की लाईन में स्कावर वाल्व लगा हुआ है। जल निगम प्रबंधक रविन्द्र राय के अनुसार यह लाईन बडनगर से आगे तक गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के कई गांवों की टंकियों को जोडा गया है। वर्तमान में यह व्यवस्था टेस्टिंग फेस में होने से प्रेशर रिलीज करना होता है। खडोतिया नाले के पास लाईन में लगे स्कावर वाल्व को खोलकर प्रेशर रिलीज किया जाता है,जिससे निकलने वाला पानी गंभीर डेम में जाता है। टेस्टिंग फेस पूर्ण होने पर प्रेशर रिलिज जैसा कोई काम बाद में नहीं करना पडेगा।

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