तराना।तहसील मुख्यालय से करीब 6 किलोमीटर दूर स्तिथ ग्रामलसुड़लिया बेचर में सोमवार शाम को करंट लगने से आदिवासी मजदूर की मृत्यु हो गई घटना के बाद जवाबदारों के लापरवाही सामने आई। मृतक के भाई बाबलु मेडा निवासी जिला झाबुआ ने बताया कि ग्राम लसुड़लिया बेचर में मेरा भाई विजेश पिता नूरा (24) निवासी झाबुआ जिलामजदूरी कर रहा था। यहां नल जल योजना अंतर्गत नर्मदा पाइपलाइन का काम चल रहा है। रोज-रोज लाइट लगाने जाता था सोमवार को भी मेरा भाई लाइट चालू करने गया था।इस दौरान करंट लगने से मौत हो गई।मैं गुजरात में मजदूरी का काम कर रहा हूं घटना की जानकारी लगने पर तराना पहुंच गया दिन भर निराकरण नहीं हुआ वहीं हमें और हमारे परिवार को पुलिस थाने में बंद कर देंगे। विधायक के आने पर पुलिस वाले चले गए उसके बाद दूसरे पुलिस वाले आए। मृतक अपने पीछे पत्नी दो बच्चे एवं बुजुर्ग पिता को छोड़कर चला गया है।घटना की जानकारी लगने पर विधायक महेश परमार शासकीय अस्पताल परिसर में पहुचे। मृतक के परिजनों को ठाधस बंधाया। विधायक ने कहा कि आदिवासी मजदूर की मौत हो गई है मौत के 24 घंटे तक भी पोस्टमार्टम नहीं हुआ।परिजन पीएमके लिए परिसर में दिनभर खड़े रहे। परिजनों को जवाबदारो द्वारा थाने में बंद करने की बात कही गई यह जवाबदारो एवं सिस्टम की नाकामी है।विधायक द्वारा मृतको को के परिजनों के लिए मुआवजा देने की मांग की है।
आदिवासी मजदूर की मौत के 24 घण्टे बाद हुआ पीएम,विधायक के हस्तक्षेप के बाद मिला परिजनों को शव
मृतक के अटेंडर मंगलवार दोपहर तक पहुचे।उसके बाद ही पीएम हो सका।जांच में तय होगी जवाबदारी:- मामले में टी रामनारायण भदोरिया ने बताया कि मृतक के परिजनों को थाने में बंद करने के बाद पूरी तरह से बे बुनियाद है। मामले में सोमवार को ही मर्ग कायम कर लिया था।
जो ठेकेदार इन्हें लाया है उसकी जिम्मेदारी हो सकती है।जिसकी की भी जिम्मेदारी है वह जाच में सामने आ जाएगा।उसके बाद वैधानिक कार्यवाही होगी।