बिना जांचे-परखे वाहनों के बदले मालिक ऑटो अप्रूव मोड पर सवाल.. प्रदेश में 5 दिन में 7 हजार + वाहन ट्रांसफर की

 इंदौर। सरकार की ऑटो अप्रूव व्यवस्था लागू करने न का उद्देश्य आधार ऑथेंटिकेशन के जरिए फेसलेस सेवा उपलब्ध कराना और वाहन मालिकों को आरटीओ के चक्कर से बचाना है। इसके तहत – मैनुअल अप्रूवल कम कर व वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया तेज करने की व्यवस्था की गई है,लेकिन विभिन्न जगाहें से सामने आए मामलों में फीस, दस्तावेज, टैक्स और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही मालिकाना हक बदलने की स्थिति सामने आई है। ऑटो अप्रूप मोड में गड़बड़ी की बात कही जा रही है, जिससे बिना जांच-परख और टैक्स बकाया होने के बावजूद वाहन ट्रांसफर हो गए हैं।      इस संबंध में मध्यप्रदेश में वाहन 4.0 के ऑटो अप्रूव मोड को लेकर सवाल उठे हैं। पिछले पांच दिनों में प्रदेशभर में 7 हजार से अधिक वाहनों के मालिक बदल गए, जबकि कई मामलों में जरूरी दस्तावेज अपलोड नहीं हुए थे, टैक्स की जांच या भुगतान बाकी था और आरटीओ स्तर पर वाहन का भौतिक सत्यापन भी नहीं हुआ था। इसके बावजूद सिस्टम ने ट्रांसफर ऑर्डर जारी कर दिए।               इंदौर आरटीओ में 2011 मॉडल की एक कार के ट्रांसफर के लिए 300 रुपए फीस जमा होने के बाद सिस्टम ने मालिकाना हक बदल दिया। बाद में पता चला कि वाहन पर 4,500 रुपए से अधिक टैक्स बकाया था और उसका वेरिफिकेशन भी नहीं हुआ था।       भोपाल में दो कारों के मामलों में जरूरी दस्तावेज अपलोड नहीं किए गए थे। ट्रांसफर फीस भी जमा नहीं हुई थी और टैक्स की जांच बाकी थी, फिर भी दोनों वाहनों का मालिकाना हक बदल
किसी का टैक्स बकाया तो किसी के दस्तावेज और वेरिफिकेशन तक नहीं हुए गया।
       धार में आधा दर्जन से अधिक ट्रैक्टरों के ट्रांसफर में खसरा-बही अपलोड नहीं की गई थी। इसी दस्तावेज के आधार पर कृषि उपयोग और उससे जुड़े टैक्स की जानकारी तय होती है। बहरहाल मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए टैक्स जांच की व्यवस्था को सिस्टम में जोड़ने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर को पत्र लिखा है। डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर किरण शर्मा का कहना था, ऑटो ट्रांसफर से जुड़ी समस्या पर विभाग ने संज्ञान लिया है।
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