साफ्ट कापी में ड्रायविंग लायसेंस एवं रजिस्ट्रेशन कार्ड से बहुत जल्द मुक्ति मिलेगी जल्द मिलने शुरू होंगे वाहन के दस्तावेज कार्ड के रूप में -परिवहन विभाग बराबर वसूल रहा है 200रूपए प्रत्येक कार्ड पर आनलाईन

उज्जैन। अगर आप वाहन चालन का लायसेंस या वाहन का पंजीयन कार्ड बनवाने जा रहे हैं तो आपसे कार्ड के 200 रूपए लिए जाएंगे लेकिन पिछले कुछ वर्षों से कार्ड की बजाय ऐसे आवेदकों को लायसेंस एवं पंजीयन साफ्ट कापी में ही मिल रहे है। बहुत जल्द परिवहन विभाग ऐसे आवेदकों को कार्ड उपलब्ध करवाने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों से संपर्क के अभाव में मामले की अधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।परिवहन विभाग एवं निजी कंपनी में हुए विवाद के बाद से पिछले 2 वर्षों से हजारों वाहन मालिकों को अपने ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन कार्ड की हार्डकॉपी नहीं मिल पा रही थी। वाहन मालिकों ने ऑनलाइन 200- 200 रुपये का शुल्क भी चुका दिया, लेकिन कार्ड उनके घर तक नहीं पहुंचे।शुल्क वसूली जारी रहा-परिवहन विभागीय सूत्रों के अनुसार इस अव्यवस्था के बीच 3 अक्टूबर 2024 को विभाग ने हार्डकॉपी न देने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था, बावजूद इसके शुल्क वसूली जारी रहा। अब इसे लेकर परिवहन आयुक्त कार्यालय ने इस समस्या के समाधान के लिए एक नई कंपनी का चयन किया है। अधिकारियों का कहना है कि नई कंपनी जल्द ही काम शुरू करेगी और लंबित पड़े सभी पेंडिंग कार्ड आवेदकों के घर भेजे जाएंगे।उज्जैन में भी हजारों कार्ड शेष-वर्ष 2024 से ही कार्ड बनाने के मामले में परिवहन विभाग की और से साफ्ट कापी दी जाने लगी थी। इसके चलते उज्जैन में विक्रम व्यापार मेले में खरीदे गए करीब 15 हजार वाहनों के कार्ड एवं इस दौरान जिले में बने वाहन चालन के 22 हजार लायसेंस के कार्ड विभाग की और से लोगों को दिए जाने शेष हैं जिसका पैसा भी लोगों से विभाग ने आनलाईन 200-200 रूपए बराबर जमा करवाया गया है। लायसेंस एवं पंजीयन की पूरी प्रक्रिया पिछले वर्षों से ही आनलाईन जारी है।विभाग एवं पुरानी कंपनी में विवाद-इस पूरे मामले में विभाग और पुरानी कंपनी के बीच 100 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान का विवाद भोपाल जिला न्यायालय में विचाराधीन है। सूत्रों ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि पुरानी कंपनी के साथ चल रहा भुगतान का विवाद अभी सुलझा नहीं है। कंपनी ने विभाग पर100 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा किया है, जिसे परिवहन विभाग ने सिरे से नकारते हुए गलत बताया है। कोर्ट के फैसले के बाद ही इस विवाद का पूर्ण समाधान हो सकेगा, लेकिन विभाग ने जनता की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए नई कंपनी के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है।अब एनएफसी तकनीक कार्ड-सूत्रों का कहना है कि नई व्यवस्था के तहत पहली बार एनएफसी तकनीक वाले स्मार्ट कार्ड वाहन मालिकों को दिए जाएंगे। यह कार्ड चिप आधारित और रीड-राइट तकनीक से लैस होंगे, जिससे कार्ड में दी गई जानकारी को आसानी से अपडेट किया जा सकेगा। परिवहन विभाग की ओर से भेजा गया यह प्रस्ताव आधुनिक सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।एक स्केनिंग में पूरा डाटा सामने होगा-सूत्रों के अनुसार इस कार्ड का सबसे बड़ा लाभ पुलिस को सड़क पर वाहनों की चेकिंग के दौरान मिलेगा। पुलिस अधिकारी एक विशेष डिवाइस का उपयोग करके चिप को स्कैन कर सकेंगे, जिससे वाहन मालिक का नाम, पता, ब्लड ग्रुप, वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर, निर्माण वर्ष, खरीदी की तारीख और टैक्स संबंधी जानकारी पल भर में स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगी। यह तकनीक कागजी कार्रवाई को कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने में काफी मददगार साबित होगी।

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