मिडिया इनफ्लूएंजर हर्षा रिछारिया ने सन्यास दीक्षा ग्रहण की,बनी हर्षानंद गिरी

 

 

उज्जैन। प्रयागराज कुंभ से चर्चा में आई सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने रविवार को यहां शिप्रा नदी के किनारे मौन तीर्थ आश्रम में महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरि से सन्यास दीक्षा ग्रहण की है। इस दौरान प्राश्चित कर्म, पिंडदान, शिखा व दंड विसर्जन की परंपरा निभाई गई। सन्यास दीक्षा उपरांत वे हर्षानंद गिरी नाम से पहचानी जाएगी।

प्रयागराज कुंभ में मोनालिसा, आईआईटी बाबा के साथ ही हर्षा रिछारिया चर्चा में आई थी। अब जहां एक और आईआईटी बाबा और मोनालिसा ने विवाह कर लिया तो वहीं दूसरी ओर हर्षा रिछारिया ने रविवार को निरंजनी अखाडा महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरी से सन्यास दीक्षा ले ली है। यहां उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में दीक्षा आयोजन हुआ। इस आयोजन में हर्षा रिछारिया ने दीक्षा लेने के दौरान परम्परा का निर्वहन किया। यहां प्राश्चित कर्म, पिण्ड दान, शिखा व दण्ड विसर्जन किया गया। दीक्षा की यह परंपरा महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरी महाराज के सानिध्य में हुई। दीक्षा के दौरान बटुकों द्वारा मंत्र उच्चारण किए गए। वहीं विभिन्न धार्मिक रश्में भी निभाई गई। मीडिया से चर्चा में स्वामी हर्षानंद गिरी ने कहा कि ईश्वर की मर्जी और उनके आशीर्वाद के कारण में इस रास्ते पर आगे बढ़ी हूं। हिंदू धर्म को सबसे बड़ा खतरा ऐसे लोगों से है जो हिंदू धर्म के बच्चों को हिंदू धर्म के खिलाफ ही खड़ा कर रहे हैं और उनके दिमाग में जहर भर रहे हैं। इसलिए हमें बच्चों को ब्रेनवाश होने से रोकना है। लव जिहाद वह दीमक से जो अंदर के अंदर फैल रहा है जिसका कोई अंदाज़ा नही लगा सकता है। लव जिहाद के कारण आने वाले समय मे बड़ी मुसीबत आने वाली है। धर्म परिवर्तन को लेकर कहा कि कुछ लोग राशन व पैसे में अपना ईमान बेचकर धर्म परिवर्तन कर लेते हैं। धर्म से कीमती कुछ नहीं है धर्म परिवर्तन करना गद्दारी है।महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरी ने कहा कि नियमों के सन्यास जीवन की उन्होंने हर्षा को दीक्षा दी है। पूर्व में कुंभ में कैलाशानंद गिरी से दीक्षा के सवाल पर उनका कहना था कि उस समय सन्यास दीक्षा नहीं ली सिर्फ एक मंत्र लिया गया था। स्वामी हर्षा नंद गिरी ने सन्यास नियमों के प्रति प्रतिबद्घता जताई है।

 

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